वायु सेना के पास कितने स्क्वाड्रन
भारत, फ्रांस से 114 राफेल विमानों की डील इसलिए कर रहा है, क्योंकि भारतीय वायु सेना के सिर्फ 29 फाइटर स्क्वाड्रन ही बच गए हैं। यह संख्या स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन से भी काफी कम हैं। जबकि, हमारे दोनों दुश्मन पड़ोसी लगातार अपनी वायु सेना को मजबूत बना रहे हैं। पाकिस्तान के पास कम से कम 25 फाइटर स्क्वाड्रन हैं। जबकि चीन के पास 60 से ज्यादा हैं और वह इसमें पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान धड़ल्ले से शामिल कर रहा है और छठी पीढ़ी की भी तैयारी कर चुका है।
राफेल की क्या है सबसे बड़ी ताकत
पहले हम राफेल लड़ाकू विमानों की ताकत देख लेते हैं। यह 4.5वीं पीढ़ी का दो इंडनों वाला मल्टीरोल फाइटर जेट है। भारतीय वायु सेना के बेड़े का सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान। इसके साथ शामिल लंबी दूरी की मेट्योर बियोंड विजुअल रेंज मिसाइल, एडवांस्ड इलेक्ट्रोनिक वॉरफेयर सूट, इंप्रूव्ड रडार और सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम इसकी ताकत और मारक क्षमता में चार चांद लगा देती हैं। राफेल में थेल्स आरबीई2 एईएसए रडार और आगे की स्टील्थ फीचर्स इसे बेहतरीन सिचुएशनल अवेयरनेस और सर्वाइवेबिलिटी मुहैया कराते हैं। राफेल विमानों से स्कैल्प क्रूज मिसाइल और हैमर मिसाइल जैसे स्मार्ट वेपन दागे जा सकते हैं, जो सटीकता के साथ डीप स्ट्राइक मिशन के लिए कहर माने जाती हैं।
पाकिस्तान की F-16 फाइटिंग फाल्कन
F-16 फाइटिंग फाल्कन पाकिस्तान के पास अमेरिका से खरीदा हुआ सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट है। लेकिन, इसके इस्तेमाल में पाकिस्तान के हाथ अमेरिकी शर्तों से बंधे हुए हैं। वह भारत के खिलाफ चोरी से ही इसका इस्तेमाल कर सकता है, क्योंकि अमेरिका ने यह आतंकवाद-विरोधी अभियानों और सुरक्षा के लिए उसे दिया हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि राफेल के एडवांस्ड इलेक्ट्रोनिक वॉरफेयर और लंबी दूरी तक मारक क्षमता के मुकाबले में यह पिछड़ जाता है।
JF-17 थंडर के भरोसे पाकिस्तान
JF-17 थंडर को चीन ने बनाया है, जिसमें पाकिस्तान ने भी हाथ बंटाया है। संख्यात्मक रूप से यह पाकिस्तानी फौज का आधार है। इसके नए वर्जन में एईएसए रडार और अपग्रेडेड एवियॉनिक्स शामिल किए गए हैं, लेकिन फिर भी रेंज, पेलोड, इंजन क्षमता और बड़े संघर्ष में आसमान में ज्यादा समय तक टिके रहने में राफेल से यह पिछड़ जाता है।
J-10c भी 4.5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट
पाकिस्तान के पास चीनी J-10c लड़ाकू विमान भी हैं। यह भी राफेल की तरह 4.5वीं पीढ़ी का मीडियम वेट मल्टीरोल विमान है। ये भी मॉडर्न एवियोनिक्स, डेल्टा-कनार्ड डिजाइन और एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम से लैस हैं। मतलब तकनीकी तौर पर यह JF-17 के मुकाबले राफेल के कहीं ज्यादा करीब है। लेकिन, लड़ाई के दौरान यह कितना उपयोगी है, इसकी परख होना अभी बाकी है। जबकि, दूसरी तरफ राफेल दुनिया में कई युद्धों में इस्तेमाल हो चुका है और भारत के लिए ऑपरेशन सिंदूर इसका सबसे दमदार उताहरण है। राफेल जांचा, परखा और पूरी तरह से तरासा गया फाइटर जेट है।













