एयरफोर्स की क्या है जरूरत?
कई सालों से, इंडियन एयरफोर्स हर साल लगभग 40 फाइटर जेट को अपने बेडे़ में शामिल करने की जरूरत की बात कहती रही है। इसका उद्देश्य है कि फोर्स में स्क्वाड्रन की ताकत को स्थिर की जा सके। साथ ही, लंबे समय से संख्या में आ रही कमी को ठीक किया जा सके। सरकार ने डिफेंस डील के साथ ही फाइटर जेट के निर्माण को लेकर जो कदम उठा रही है उससे ऐसी नींव रखी जा रही है, जिससे एयरफोर्स का अपने बेडे़ में हर साल जरूरी फाइटर प्लेन को शामिल कर सकेगी।
2030 से फाइटर जेट की दिशा में दिखेगा बदलाव
डिफेंस.इन की रिपोर्ट के अनुसार राफेल के साथ ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के तेजस Mk1A, तेजस MkII और आखिर में एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को शामिल करके एक साथ प्रोडक्शन को बढ़ावा देने से 2030 के बाद से देश के फाइटर इंडक्शन कर्व को नया आकार मिल सकता है।
फ्रांस के साथ प्रस्तावित राफेल मेगा डील से भारत में एक खास प्रोडक्शन लाइन बनने की उम्मीद है। अगर टाइमलाइन बनी रहती है, तो भारतीय राफेल की मैन्युफैक्चरिंग लाइन 2029 के आखिर तक एक्टिव हो सकती है। ऐसे में यह साल 2031 तक पूरी ऑपरेशनल कैपेसिटी तक पहुंच सकती है।
एक बार स्थिर हो जाने पर, यह लाइन हर साल लगभग 24 एयरक्राफ्ट बना सकती है। अकेले यह संख्या ही भारत की ऐतिहासिक रूप से धीमी इंडक्शन रफ्तार में एक बड़ा बदलाव दिखाएगी। स्वदेशी प्रोडक्शन के साथ, यह कभी-कभार बैच डिलीवरी के बजाय लगातार अधिक मात्रा में फ्लीट बढ़ाने की संभावना बनाता है।
एचएएल प्रोडक्शन से बढ़ेगी रफ्तार
रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक, भारतीय वायु सेना असल में दशकों में पहली बार हर साल करीब 40 एयरक्राफ्ट शामिल करने की स्थिति में हो सकता है। असली तेजी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ पहले शुरू होती है। HAL से उम्मीद है कि वह 2028 से तेजस Mk1A की डिलीवरी बढ़ाएगी, जो मौजूदा बड़े ऑर्डर पूरे होने पर हर साल 30 एयरक्राफ्ट तक पहुंच सकती है। ये डिलीवरी लगभग 2032 तक जारी रहने का अनुमान है।
तेजस Mk2 में में बदलाव रोडमैप का अहम हिस्सा
इस रोडमैप का एक जरूरी हिस्सा है तेजस Mk1A से अधिक काबिल तेजस Mk2 में आसानी से बदलाव है। 2032 के आखिर तक, Mk1A के लिए अभी इस्तेमाल हो रहे इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर को Mk2 के लिए फिर से तैयार किए जाने की उम्मीद है। इसमें पावरफुल GE F414 इंजन और अधिक पेलोड कैपेबिलिटी होगी।
तेजस Mk2 के लिए कम रेट पर शुरुआती प्रोडक्शन 2033 के आसपास शुरू होने की उम्मीद है। साल 2034 तक वॉल्यूम बढ़ाया जाएगा। एक बार जब यह लाइन स्टेबल हो जाएगी, तो इससे हर साल 24 जेट बनाने का अनुमान है। इस दौरान, अगर राफेल लाइन तेजस Mk2 के प्रोडक्शन में तेजी के साथ हर साल 24 जेट देना जारी रखती है, तो भारत 2030 के दशक के बीच तक सालाना इंडक्शन के आंकड़े 40 जेट के बराबर या उससे अधिक देख सकता है।













