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  • राफेल पर कहां झुका फ्रांस, कहां दिखा रहा तेवर, सोर्स कोड, इंजन, SPECTRA वॉरफेयर, क्या है शर्तें, कहां बनी सहमति?

    पेरिस/नई दिल्ली: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इन दिनों नई दिल्ली में हैं और माना जा रहा है कि 114 राफेल फाइटर जेट को लेकर डील हो सकती है। लेकिन इससे पहले फ्रांसीसी अखबार L’Essentiel de l’Éco की एक रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत को राफेल लड़ाकू


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    By Azad Hind Desk फरवरी 19, 2026
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    पेरिस/नई दिल्ली: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इन दिनों नई दिल्ली में हैं और माना जा रहा है कि 114 राफेल फाइटर जेट को लेकर डील हो सकती है। लेकिन इससे पहले फ्रांसीसी अखबार L’Essentiel de l’Éco की एक रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत को राफेल लड़ाकू विमान के मुख्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और इसके बहुत मशहूर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, जिसमें SPECTRA डिफेंसिव एड्स पैकेज भी शामिल है, उसे कंट्रोल करने वाला सोर्स कोड नहीं दिया जाएगा। हालांकि क्या इसकी वजह से राफेल सौदे पर कोई असर पड़ेगा या नहीं, इसकी जानकारी नवभारत टाइम्स के पास नहीं है।

    इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट का सोर्स कोड नहीं मिलने का मतलब भारत की राफेल लड़ाकू विमान के ऑपरेशनल आजादी पर असर होगा। बगैर सोर्स कोड, भारतीय इंजीनियर विमान में भारतीय एडवांस सेंसर, अस्त्र जैसी भारतीय मिसाइलें नहीं लगा पाएंगे। इसके अलावा भविष्य में अपग्रेडेशन भी बगैर सोर्स कोड नहीं हो पाएगा। भारत को राफेल लड़ाकू विमान में हर बड़े बदलाव के लिए, उसमें भारतीय मिसाइल, रडार या कोई और एडवांस हथियार लगाने के लिए फ्रांस की तरफ देखना होगा।

    राफेल के SPECTRA वॉरफेयर पर फंसा पेंच
    सोर्स कोड नहीं मिलने से हर बड़े बदलाव के लिए डसॉल्ट एविएशन, थेल्स और फ्रांस के दूसरे पार्टनर्स से कोऑर्डिनेशन और अक्सर मंजूरी की जरूरत होगी। यह एक ऐसा सेटअप है जो शुरुआती 36-एयरक्राफ्ट डील और उसके बाद नेवल राफेल-M ऑर्डर में किया गया था। लेकिन अब चूंकी भारत 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए डील कर रहा है और ये डील 3.25 लाख करोड़ यानि करीब 36 अरब डॉलर से ज्यादा का हो रहा है, तो भारत को राफेल में ज्यादा स्वायत्तता चाहिए। भारत हर अपग्रेडेशन के लिए या हर बार नये हथियारों को शामिल करने के लिए फ्रांस की तरफ नहीं देख सकता है। ये प्रक्रिया काफी लंबी होती है, जिसका असर ऑपरेशनल क्षमता पर भी पड़ता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और फ्रांस के डील करने वाले अधिकारियों के बीच काफी ज्यादा माथापच्ची की जा रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारतीय अधिकारियों का फोकस राफेल प्लांट के जरिए भारत में ज्यादा से ज्यादा नौकरी के अवसर उत्पन्न करने, राफेल में भारत में बनने वाले ज्यादातर उपकरण लगाने, जैसे टाटा या HAL के साथ पार्टनरशिप और असली इंजीनियरिंग ट्रांसफर, जो सरफेस-लेवल ऑफसेट से आगे की बात ही, उस तरह की बाततीच की जा रही है।

    राफेल को लेकर क्या फ्रांस की सरकार पर भी दबाव?
    फ्रांसीसी मीडिया में भी भारत से होने वाले इस संभावित राफेल डील को लेकर काफी कुछ लिखा गया है। फ्रांसीसी अखबार के मुताबिक:-

    • फ्रांस की कंपनी ‘साफ्रान’ राफेल के M88 इंजन को भारत में ही असेंबल करने पर सहमत हो गई है।
    • फ्रांसीसी मीडिया की दलील है कि यह एक बड़ा बदलाव है क्योंकि हाई-टेक कंपनियां आमतौर पर अपनी मुख्य तकनीक किसी दूसरे देश को देने से बचती हैं।
    • फ्रांसीसी अखबार ने लिखा है कि भारत अब एक “दब्बू खरीदार” नहीं है। नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि बिना स्थानीयकरण के कोई खरीदारी नहीं होगी।
    • 114 अतिरिक्त राफेल विमानों के ऑर्डर के लिए ‘मेक इन इंडिया’ सबसे बड़ी शर्त है, जिसे विदेशी सप्लायर्स को मानना ही होगा।
    • फ्रांस भारत के भविष्य के स्टील्थ फाइटर AMCA के लिए 110 kN की शक्ति वाले इंजन को ‘को-डिजाइन’ (साथ मिलकर बनाने) करने का प्रस्ताव दे रहा है।
    • फ्रांस यह जोखिम लेने को तैयार है कि भविष्य में भारत उसका प्रतिस्पर्धी बन सकता है, क्योंकि वह अगले दशकों के सबसे बड़े रक्षा बाजार (भारत) में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है।
    • नवंबर 2025 में हैदराबाद में बनाए गये MRO कॉम्प्लेक्स के बाद, अब लक्ष्य यह है कि 2035 तक वहां हर साल 300 इंजन तैयार किए जाएं।

    फ्रांसीसी अखबार ने लिखा है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ पार्टनरशिप में राफेल के M88 इंजन को भारतीय जमीन पर असेंबल करने के लिए राजी होकर, सफ्रान एक ऐसी लाइन पार कर रहा है जिसे हाई-टेक इंडस्ट्री ने लंबे समय से पार करने से मना कर दिया था। यह फ्रांस की इंडस्ट्रियल ताकत का ट्रांसफर है।

    इसने लिखा है कि भारत अब एक सीधे-सादे खरीदार की तरह बातचीत नहीं कर रहा है। बल्कि 114 और राफेल के आने वाले ऑर्डर के साथ, जिससे टारगेट फ्लीट 330 एयरक्राफ्ट तक पहुंच जाएगा, नई दिल्ली अपने नियम लागू कर रही है। जिसमें सबसे बड़ा शर्त ये है कि बिना मेक इन इंडिया के डील किसी भी हालत में नहीं होगी। अब देखना दिलचस्प है कि 114 राफेल को लेकर इमैनुएल मैक्रों के दौरे के दौरान ही डील होती है या आगे भी बातचीत जारी रहेगी।

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