रिलायंस ने पिछले शुक्रवार को दिसंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए थे। लेकिन तिमाही के नतीजों ने भी शेयर की कीमत को बढ़ाने में मदद नहीं की। मंगलवार को रिलायंस कंपनी के शेयर का 14-दिन का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 24 पर आ गया, जो एक महत्वपूर्ण मोमेंटम इंडिकेटर है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक RSI का यह स्तर पिछले पांच साल में कभी नहीं देखा गया, जो यह बताता है कि शेयर बहुत ज्यादा बिक चुके हैं। रिलायंस के शेयर 2011 के बाद से साल की सबसे खराब शुरुआत की ओर बढ़ रहे हैं।
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अनुमान में कटौती
तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद ज्यादातर विश्लेषकों ने स्टॉक पर अपने अनुमानों में 1-3% की कटौती की है। यह कटौती मुख्य रूप से रिटेल सेगमेंट में आई कमजोरी के कारण हुई है। 28 ब्रोकरेज फर्मों की इस स्टॉक पर नजर है। उनमें से ज्यादातर का मानना है कि शेयर की कीमत मौजूदा बाजार भाव से 23% तक बढ़ सकती है। इन फर्मों ने शेयर का एवरेज टारगेट प्राइस 1,717 रुपये रखा है। कम से कम 11 विश्लेषकों ने 1,750 रुपये या उससे अधिक का टारगेट प्राइस दिया है। इनमें से 7 ब्रोकरेज फर्मों ने तो 1,800 रुपये या उससे अधिक का लक्ष्य रखा है।
कुल 28 ब्रोकरेज फर्मों में से 26 ने ‘बाय’ या ‘ऐड’ की सलाह दी है। रिटेल सेगमेंट के कमजोर प्रदर्शन के पीछे क्विक कॉमर्स के विस्तार, फैशन और लाइफस्टाइल सेगमेंट में आई सुस्ती और नए लेबर कोड का असर बताया जा रहा है। विश्लेषकों ने यह भी कहा है कि चौथी तिमाही में रिटेल के लिए पिछला बेस काफी ऊंचा है, इसलिए आने वाले समय में ग्रोथ के आंकड़े मामूली रहने की उम्मीद है। विश्लेषकों ने आने वाले समय के लिए कुछ खास बातों पर ध्यान दिलाया है, जिनमें जियो की लिस्टिंग, टैरिफ में बढ़ोतरी, नए एनर्जी इकोसिस्टम का तेजी से बढ़ना और रिटेल ग्रोथ में सुधार शामिल हैं।
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ग्रोथ का इंजन
एचएसबीसी (HSBC) का कहना है कि वह रिटेल में सुधार को लेकर पॉजिटिव हैं। जियो लगातार बढ़ रहा है और अपनी घोषित आईपीओ के साथ वैल्यू डिस्कवरी के लिए तैयार है। O2C बिजनेस में मांग में धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है, हालांकि हम पिछली उच्च मार्जिन की पूरी तरह से वापसी को लेकर अभी भी थोड़े संशय में हैं। उम्मीद है कि जब नया एनर्जी बिजनेस पूरी तरह से स्केल-अप हो जाएगा, तो यह एक नया ग्रोथ इंजन बनेगा। एचएसबीसी ने यह भी कहा कि तीसरी तिमाही एक अस्थायी झटका थी और अब मोमेंटम बढ़ रहा है।
भू-राजनीतिक चिंताओं और रूसी कच्चे तेल के आयात पर बढ़ते फोकस के कारण विश्लेषक O2C बिजनेस को लेकर सतर्क हैं। कोटक इक्विटीज का कहना है कि जैसे-जैसे रूसी कच्चे तेल को अधिक महंगे कच्चे तेल से बदला जा रहा है, O2C में कुछ बाधाएं बनी हुई हैं। रिलायंस के लिए हमारे ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन अनुमान रूढ़िवादी हैं, क्योंकि हमारा मानना है कि रूसी कच्चे तेल के आयात में कमी से कच्चे तेल की लागत बढ़ेगी और इस प्रकार मार्जिन पर असर पड़ेगा।
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ग्रोथ की कमजोरी
मॉर्गन स्टेनली के अनुमानों में अब कंज्यूमर रिटेल में ग्रोथ की कमजोरी, फ्यूल रिफाइनिंग साइकिल में मजबूती और नए एनर्जी में एक्जीक्यूशन शामिल है, क्योंकि रिलायंस आने वाली तीन तिमाहियों में सौर और बैटरी स्टोरेज उत्पादन को बढ़ाएगा। उसने फैशन और लाइफस्टाइल वर्टिकल में चुनौतियों को देखते हुए रिलायंस के शेयर का टारगेट प्राइस मामूली रूप से घटाकर 1,803 रुपये कर दिया है।
(डिस्क्लेमर: इस विश्लेषण में दिए गए सुझाव व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, आज़ाद हिन्द के नहीं। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श कर लें। क्योंकि शेयर बाजार की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।)












