रिलायंस को जनरल लाइसेंस मिलने का मतलब है कि कंपनी वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों का उल्लंघन किए बिना सीधे तेल खरीद सकती है। साथ ही वह वेनेजुएला से खरीदे गए तेल को बेच भी सकती है। इससे रिलायंस को अपनी क्रूड कॉस्ट कम करने में मदद मिलेगी। रिलायंस के पास दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है जो हर तरह के कच्चे तेल को प्रोसेस कर सकती है।
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क्या होगा फायदा?
रिलायंस ने जनवरी में लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। कंपनी ने इस बारे में भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया। यूएस ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल ने भी तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। इस महीने रिलायंस ने वेनेजुएला से 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। यह खरीदारी ट्रेडर कंपनी Vitol से की गई थी। Vitol और Trafigura को पहले ही अमेरिका से लाइसेंस मिल चुका है।
सूत्रों के मुताबिक वेनेजुएला से सीधे तौर पर तेल खरीदने से रिलायंस को काफी बचत होने की उम्मीद है। रूस के तेल की तुलना में वेनेजुएला का तेल सस्ता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में भारत पर से 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ हटा दिया था। भारत पर रूसी से तेल खरीदने के लिए यह टैरिफ लगाया गया था। माना जा रहा है कि अब भारत अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदेगा।
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रिलायंस की रिफाइनरीज
रिलायंस वेनेजुएला से नियमित रूप से तेल खरीदती थी लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसने पिछले साल की शुरुआत में वेनेजुएला से तेल की खरीद बंद कर दी थी। रिलायंस की दो रिफाइनरीज में रोजाना 14 लाख बैरल कच्चा तेल प्रोसेस किया जा सकता है। भारत और अमेरिका ने हाल में एक ट्रेड डील की घोषणा की थी। माना जा रहा है कि अब भारतीय कंपनियां रूस से तेल की खरीदारी कम कर सकती हैं।












