डिफेंस मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रीक अधिकारियों ने भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के आकाश सिस्टम का टेक्निकल प्रोफाइल का रिव्यू किया है। रिव्यू के जरिए ग्रीस के रक्षा अधिकारी यह जानना चाहते हैं कि यह उसके S-300 सिस्टम की जगह कैसे ले सकता है। हालांकि ग्रीस या भारत की सरकार ने आधिकारिक तौर पर आकाश-NG से जुड़ी डील पर कोई जानकारी नहीं दी है।
हवाई सुरक्षा बेहतर करना चाहता है ग्रीस
ग्रीस ने काफी समय से ग्राउंड-बेस्ड एयर डिफेंस लेयर बनाने के लिए रूस की S-300 वायु रक्षा प्रणाली पर भरोसा किया है। हालिया समय के जियोपॉलिटिकल बदलाव, मेंटेनेंस की चुनौतियां और दूसरे क्षेत्रीय कारणों की वजह से ग्रीस अपनी रणनीति बदल रहा है। ग्रीस की कोशिश है कि अपने हथियार सप्लायरों में बदलाव लाया जाए।
आकाश-NG भारत के आकाश सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम का अपग्रेडेड वर्जन है। DRDO के डाटा से पता चलता है कि इसकी रेंज करीब 50 किमी है। यह सिस्टम बेहतर कमांड-एंड-कंट्रोल इंटीग्रेशन के जरिए एयरक्राफ्ट, क्रूज मिसाइल और दूसरे हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया गया है।
आकाश-NG को परख रहे ग्रीस अधिकारी
ग्रीक अधिकारी फिलहाल यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या आकाश-NG को ड्रोन और मिसाइल के खतरों का मुकाबला करने के मकसद से बनाए गए अकिलीज शील्ड मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस आर्किटेक्चर में शामिल किया जा सकता है। आकाश इसमें शामिल हो जाता है तो यह ग्रीस के लिए एक अच्छा विकल्प साबित होगा।
आकाश की कीमत और रखरखाव में आसानी को भी ग्रीस के अधिकारी देख रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि MIM-104 पैट्रियट और आयरन डोम जैसे सिस्टम की लागत को देखते हुए आकाश अच्छा विकल्प है। भारतीय डिफेंस सिस्टम को ग्रीस में लागत-प्रतिस्पर्धी विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है, जो S-300 की जगह ले सकता है।
भारत-ग्रीस के रक्षा संबंध
भारत और ग्रीस के बीच हालिया समय में संबंधों में बेहतरी आई है। खासतौर से दोनों ंमुल्कों में रक्षा संबंध सुधरे हैं। इस साल जनवरी में दोनों पक्षों ने मिलिट्री कोऑपरेशन प्रोग्राम 2026 पर साइन किए, जिसमें जॉइंट एक्सरसाइज और ट्रेनिंग शामिल है। सितंबर 2025 में दोनों देश नेवल एक्सरसाइज कर चुके हैं।













