• International
  • रूस-चीन के साथ मिलकर RIC फोरम को जिंदा करेगा भारत, दिल्ली की रजामंदी में क्या है सबसे बड़ी अड़चन?

    मॉस्को: रूस, भारत और चीन का त्रिपक्षीय फोरम RIC एक बार फिर चर्चा में आ गया है। रूस ने चीन और भारत के साथ ट्रोइका को शुरू करने की अपील की है। रूस और चीन की ओर से इस फोरम को जिंदा करने की इच्छा बार-बार जताई गई है। हालांकि भारत इसके लिए बहुत उत्साहित


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk फरवरी 1, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    मॉस्को: रूस, भारत और चीन का त्रिपक्षीय फोरम RIC एक बार फिर चर्चा में आ गया है। रूस ने चीन और भारत के साथ ट्रोइका को शुरू करने की अपील की है। रूस और चीन की ओर से इस फोरम को जिंदा करने की इच्छा बार-बार जताई गई है। हालांकि भारत इसके लिए बहुत उत्साहित नहीं दिखा है। भारत के चीन के साथ सीमा विवाद और अमेरिका-पश्चिम विरोधी ग्रुप का हिस्सा बनने की अनिच्छा इसकी वजह है। ऐसे में सवाल है कि क्या भारत की ओर से रूस की अपील का स्वागत किया जाएगा।

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दिल्ली और बीजिंग के साथ मॉस्को के संबंधों की तारीफ करते हुए रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिपक्षीय बातचीत फिर से शुरू करने का आह्वान किया है। पहली बार साल 1998 में तत्कालीन रूसी प्रधानमंत्री येवगनी प्रिमकोव की ओर से प्रस्तावित RIC चीन-भारत तनाव के कारण जमीन पर नहीं आ पाया है।

    भारत-चीन में भरोसे की कमी

    साउथ एशिया और इंडो-पैसिफिक की जियोपॉलिटिक्स के जानकार सगीना वाल्यात का मानना है कि चीन के साथ सीमा विवाद के चलते भारत की RIC में सीमित भूमिका रहेगी। भारत और चीन के बीच अभी भरोसे की कमी है। साल 2020 की गलवान झड़प के बाद लंबी बैठकों के बावजूद दोनों तरफ तनाव बना हुआ है।

    वाल्यात का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन की पाकिस्तान को मदद भी भारत को RIC के लिए असहज करेगी। भारत के शीर्ष सैन्य अफसर ये मान चुके हैं कि भारत के ऑपरेशन के दौरान बीजिंग नेइस्लामाबाद को उन्नत हथियार और खुफिया जानकारी दी। चीन ने भारत की सैन्य कार्रवाई को कमजोर करने के लिए गलत सूचना अभियान भी चलाए।

    तीनों देशों के अलग-अलग विचार

    तक्षशिला इंस्टीट्यूशन थिंक टैंक की स्टाफ रिसर्च एनालिस्ट अनुष्का सक्सेना कहती हैं, ‘भारत RIC के पुनरुद्धार पर यथार्थवादी और गैर-प्रतिबद्ध बना हुआ है। भारत ऐसे मूल्यों पर आधारित एजेंडे से जुड़ना नहीं चाहता, जो RIC को अमेरिका और पश्चिम के मुकाबले खड़ा करता है। दिल्ली बहुध्रुवीयता में विश्वास करता है।’

    एनालिस्ट्स का कहना है कि अलग-अलग प्राथमिकताएं और प्रोजेक्ट भी RIC के विकास में रुकावट डाल सकते हैं। अनुष्का सक्सेना कहती हैं कि RIC के फिर से शुरू होने से रूस को सबसे ज्यादा फायदा होगा। RIC के बनने से रूस को एक अलग-थलग देश के रूप में नहीं देखा जाएगा। वह तीनों देशों के पेमेंट सिस्टम को कोऑर्डिनेट और इंटीग्रेट करके तकनीकी प्रतिबंधों से बचने के लिए इस ग्रुप का इस्तेमाल करेगा।

    तीनों देशों में कई मुद्दों पर एकता नहीं

    अनुष्का का कहना है कि डी-डॉलराइजेशन पर भी इन तीनों देशों के बीच अभी तक कोई एकता नहीं है। भारत इस विचार का विरोध कर रहा है। वहीं चीन युआन को अंतर्राष्ट्रीय बनाने पर जोर दे रहा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भारत की विदेश नीति के स्कॉलर प्रतीक जोशी कहते हैं कि RIC पर कोई भी फैसला लेने से पहले भारत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का देश के प्रति रवैये का इंतजार करेगा।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।