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  • रूस ने जापान के नजदीक शुरू की सबसे घातक Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट की तैनाती, पुतिन का इरादा क्या है?

    मॉस्को: रूस ने जापान के करीब अपने एयरबेस पर Su-57 लड़ाकू विमानों की तैनाती शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, रशियन एयरोस्पेस फोर्सेज यानि रूसी एयरफोर्स ने पड़ोसी देश जापान के पास खाबरोवस्क इलाके में द्ज़्योमगी एयर बेस पर नए Su-57 पांचवीं पीढ़ी के विमानों की तैनाती शुरू कर दी है। कम से कम


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    By Azad Hind Desk फरवरी 12, 2026
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    मॉस्को: रूस ने जापान के करीब अपने एयरबेस पर Su-57 लड़ाकू विमानों की तैनाती शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, रशियन एयरोस्पेस फोर्सेज यानि रूसी एयरफोर्स ने पड़ोसी देश जापान के पास खाबरोवस्क इलाके में द्ज़्योमगी एयर बेस पर नए Su-57 पांचवीं पीढ़ी के विमानों की तैनाती शुरू कर दी है। कम से कम 15 एसयू 57 इस एयरबेस पर देखे गये हैं। इस जगह को रूस की सबसे संवेदनशील जगहों में से एक माना जाता है और अभी यहां अभी तक Su-35S लड़ाकू विमान मौजूद रहते थे। यह सेंट्रलनाया उगलोवाया एयर बेस के पास है, जहां Su-35S और MiG-31BM इंटरसेप्टर दोनों हैं। रूसी वायुसेना ने ये तैनाती उस वक्त की है जब उसे एसयू 57 लड़ाकू विमानों के नये खेप मिलने लगे हैं।

    आपको बता दें कि द्ज़्योमगी एयर बेस कोम्सोमोल्स्क-ऑन-अमूर में गागरिन एयरक्राफ्ट प्लांट के पास है, जिसे कोम्सोमोल्स्क-ऑन-अमूर एयरक्राफ्ट प्लांट के नाम से भी जाना जाता है। यहां सभी Su-35 और Su-57 सीरियल प्रोडक्शन मॉडल, फाइनल असेंबली से गुजरते हैं। एयरक्राफ्ट की पहली रेजिमेंट को इस फैसिलिटी के पास स्थायी बेस करने से उनके शुरुआती ऑपरेशन के दौरान, आने वाली दिक्कतों को ज्यादा आसानी से ठीक किया जा सका है।

    जापान के करीब Su-57 स्टील्थ विमानों की तैनाती
    हालांकि इन सबके बावजूद इस फैसिलिटी में Su-57 को फिर से तैनात करने से आगे के मकसदों के बारे में काफी अटकलें लगाई जा रही हैं। एक संभावना यह है कि इसका मकसद पड़ोसी जापान को एक संदेश देना हो सकता है। क्योंकि प्रधानमंत्री साने ताकाइची के सत्ता में आने के बाद संभावना है कि जापान अमेरिका के साथ और मजबूती से अलायंस बनाएगा। अमेरिका, जापान के रास्ते चीन और रूस दोनों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई कर सकता है। Su-57 लड़ाकू विमानों को Su-35 फाइटर्स और MiG-31 इंटरसेप्टर्स के साथ बेस पर तैनात करने से नए स्टेल्थ एयरक्राफ्ट को पुराने टाइप के एयरक्राफ्ट्स के साथ ऑपरेट करने की ट्रेनिंग मिल सकती है।

    MiG-31 में बड़े सेंसर्स लगे होते हैं और यह एयरबोर्न कमांड पोस्ट के तौर पर काम करने के लिए सही माना जाता है। वहीं, Su-57s, Su-35 और MiG-31 यूनिट्स को अलग-अलग एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग भी दे सकते हैं, ताकि जापान में तैनात अमेरिकी एयरफोर्स के विमानों को भी चुनौती दिया जा सके। रूस Su-57 लड़ाकू विमान का इस्तेमाल जापान के आसपास के इलाकों में टोही मिशनों को अंजाम देने के लिए कर सकता है। इन्हें शायद जापानी इलाके के पास रूसी बॉम्बर और टोही ऑपरेशन के लिए एस्कॉर्ट मिशन उड़ाने के लिए और शायद प्रशांत महासागर में अलास्का तक उड़ाने के लिए तैनात किया जा सकता है। इन फाइटर्स की रेंज दुनिया में किसी भी तरह के फाइटर्स से लंबी है, जिनका कॉम्बैट रेडियस US एयर फोर्स के F-35 और F-22 से दोगुना है। हालांकि वे अभी भी AL-51F नेक्स्ट जेनरेशन इंजन की कमी से परेशान हैं, जिनके डेवलपमेंट में काफी देरी हुई है।

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