बिजनेस रिकॉर्डर के मुताबिक, अब्दुल अलीम खान और दिमित्री स्टानिस्लावोविच की बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि मॉस्को-इस्लामाबाद के लिए सीधी फ्लाइट बिना देर किए शुरू की जानी चाहिए। अलीम खान ने इस दौरान कहा कि पाकिस्तान सरकार ट्रांसपोर्ट सेक्टर में सहयोग बढ़ाने के लिए सड़क नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के विकास में रूस के साथ मिलकर काम करेगी।
ट्रकों से होगी रूस-पाक में माल ढुलाई
दोनों मंत्रियों ने पाकिस्तानी मालवाहक ट्रक ड्राइवरों के सामने आने वाले वीजा और इससे जुड़े मुद्दों को हल करने का भरोसा दिलाया है। दोनों देशों के बीच बैंकिंग चैनल बढ़ाने और फाइनेंशियल रुकावटों को दूर करने पर भी बातचीत हुई है। इससे दोनों देशों के बीच ट्रकों के जरिए माल ढुलाई आसान हो जाएगी।
अलीम खान ने कहा कि पाकिस्तान की चीन और दूसरे देशों के जरिए लैंड कॉरिडोर बनाने में गहरी दिलचस्पी है। इससे सेंट्रल एशियन देशों के जरिए रूस के साथ असरदार कनेक्टिविटी बन सके। दिमित्री जेवरेव ने पाकिस्तान के साथ ट्रांसपोर्ट और हाईवे कनेक्टिविटी बढ़ाने में दिलचस्पी दिखाते हुए कोऑपरेशन की संभावना पर जोर दिया।
पाकिस्तान और रूस के संबंध
पाकिस्तान और रूस के संबंध हालिया महीनों में बेहतर हुए हैं। बीते साल रूस की पाकिस्तान से कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें हुईं हैं। इसमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मुलाकात भी शामिल है। रूस और पाकिस्तान अपने व्यापार और आर्थिक सहयोग के विकास के लिए कई कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं।
रूस ने पाकिस्तान में कई क्षेत्रों में निवेश करने में दिलचस्पी दिखाई है। खासतौर से वह पाकिस्तान की स्टील मिल्स और रेलवे को सुधार रहा है। पाकिस्तान और रूस के बीच अभी तक सिर्फ व्यापार पर ही ज्यादा फोकस रहा है। हालांकि पाकिस्तान की यह कोशिश भी रही है कि वह रूस के साथ वह रक्षा क्षेत्र में भी संबंध बनाए।
क्यों ध्यान खींच रही ये नई ‘दोस्ती’
रूस और भारत दशकों पुराने भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं। वहीं पाकिस्तान को अमेरिकी खेमे का माना जाता है। ऐसे में पाकिस्तान का रूस के करीब आना दुनिया का ध्यान खींच रहा है। पाकिस्तान के रूस के साथसंबंधों को ठीक करने में चीन भी मदद कर रहा है। चीन की कोशिश है कि भारत के आसपास एक मोर्चा बनाया जाए।













