AIMSA द्वारा लिखे गए लेटर में कहा गया है कि इस तरह की घटनाएं न केवल छात्रों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों में डर का माहौल पैदा करती हैं। डॉक्टरों के इस संगठन ने मांग की है कि भारतीय छात्रों के लिए स्पष्ट एडवाइजरी जारी की जाए और हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में उन्हें तुरंत मदद मिल सके।
AIMSA ने भारत सरकार से की ये 4 मांगें
- पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने के लिए संबंधित देशों की सरकारों के साथ तुरंत कूटनीतिक पहल की जाए।
- विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए सुरक्षा व्यवस्था और सहायता तंत्र को मजबूत किया जाए।
- खतरे या भेदभाव का सामना कर रहे छात्रों के लिए स्पष्ट एडवाइजरी और आपातकालीन हेल्पलाइन जारी की जाए।
- विदेशी विश्वविद्यालयों और सरकारों के साथ समन्वय बढ़ाकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।
क्या है मामला?
रूस के बश्कोर्तोस्तान गणराज्य के एक विश्वविद्यालय में शनिवार को चाकू से किए गए हमले में चार भारतीय छात्रों समेत कम से कम छह लोग घायल हो गए। मीडिया में आई खबरों और यहां भारतीय मिशन की तरफ से यह जानकारी दी गयी।
रूस के गृह मंत्रालय ने कहा कि प्रारंभिक खबरों के अनुसार, चाकू लिये एक किशोर रूस के बश्कोर्तोस्तान गणराज्य के उफा में स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्रावास में घुस गया, उसने वहां रहने वाले छात्रों पर हमला किया और उनमें से कई को चाकू मार दिया।
भारतीय दूतावास के अधिकारी संपर्क में
इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते हुए मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास ने कहा, ‘चार भारतीय छात्रों सहित कई लोग घायल हुए हैं।’ दूतावास ने कहा कि वह स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और कजान स्थित वाणिज्य दूतावास के अधिकारी घायल छात्रों को सहायता प्रदान करने के लिए उफा रवाना हो गए हैं।













