लावरोव ने पिछले साल अलास्का में हुई शांति वार्ता का जिक्र किया और कहा कि अमेरिका ने यूक्रेन को लेकर एक प्रस्ताव दिया था, जिसे रूस ने मान लिया था। उन्होंने कहा, ‘वे (अमेरिका) हमसे कहते हैं कि यूक्रेन की समस्या का समाधान होना चाहिए। एंकोरेज में हमने अमेरिकी प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था। अमेरिकी स्थिति हमारे लिए महत्वपूर्ण थी। उनके प्रस्ताव को स्वीकार करके हमने यूक्रेन मुद्दे को हल करने का काम पूरा कर लिया था। साथ ही बड़े पैमाने पर, व्यापक और आपसी लाभकारी सहयोग की ओर बढ़ने की उम्मीद की थी। लेकिन अब तक हकीकत बिल्कुल विपरीत है। नए बैन लगाए जा रहे हैं, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून कन्वेंशन का उल्लंघन करते हुए खुले समुद्र में टैंकरों के खिलाफ ‘युद्ध’ छेड़ा जा रहा है।’
Russian Oil: रूसी तेल के टैंकर रोकना इतना आसान नहीं होगा, भारत को चुकानी होगी भारी कीमत
एलएनजी पर भी रोक की कोशिश
रूस ने कहा कि अमेरिका रूसी एलएनजी (Liquefied Natural Gas) पर भी रोक लगाने की कोशिश कर रहा है। लावरोव ने कहा, ‘वे भारत और हमारे अन्य साझेदारों को सस्ते, किफायती रूसी ऊर्जा संसाधनों को खरीदने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें बहुत महंगी कीमतों पर अमेरिकी LNG खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। यूरोप पर तो पहले ही प्रतिबंध लगा दिया गया है।’
लावरोव ने यह भी कहा कि अमेरिका ऊर्जा मार्गों और बड़े बाजारों पर नियंत्रण करना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘हमें इन सब बातों का ध्यान रखना होगा। साथ ही भारत, चीन, इंडोनेशिया और ब्राजील की तरह सभी देशों के साथ सहयोग के लिए खुले रहना होगा, जिसमें अमेरिका जैसे बड़े देश भी शामिल हैं। हम ऐसी स्थिति में हैं जहां अमेरिकी खुद रास्ते में कृत्रिम बाधाएं पैदा कर रहे हैं।’
कम हुआ रूसी तेल का आयात
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ऐसी खबरें हैं कि भारत रूस से तेल का आयात कम कर रहा है। इस मुद्दे पर विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने सोमवार को कहा कि भारत के ऊर्जा संबंधी फैसले राष्ट्रीय हित से तय होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि देश को महंगाई पर आयात निर्भरता के प्रभाव पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।













