जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन ने व्यवस्था दी कि देश के कई राज्यों में हमदर्द लैब के प्रोडक्ट रूह अफजा को टैक्स में छूट वाले दायरे में रखा गया है। इससे हमदर्द की दलील मजबूत होती है। पीठ ने माना कि रूह अफजा को फ्रूड ड्रिंक मानने की व्याख्या कृत्रिम नहीं थी बल्कि पूरी तरीके से व्यावसायिक रूप से मान्य और वास्तविक थी। कोर्ट ने कहा कि रूह अफजा कानून के तहत फ्रूट ड्रिंक/प्रोसेस्ड फ्रूट प्रोडक्ट के रूप में क्लासीफाई है और इस पर संबंधित एसेसमेंट ईयर में 4 फीसदी की रियायती दर से वैट लगेगा।
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क्या था मामला?
इसके साथ ही कोर्ट ने कंपनी की अपील को स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रूह अफजा को नॉन-फ्रूट ड्रिंक करार दिया था। उत्तर प्रदेश वैट एक्ट, 2008 के तहत रूफ अफजा के टैक्स क्लासिफिकेशन को लेकर विवाद शुरू हुआ था। कानून के तहत फ्रूट ड्रिंक/प्रोसेस्ड फ्रूट प्रोडक्ट पर 4 फीसदी वैट का प्रावधान था जबकि बाकी ड्रिंक्स पर 12.5 फीसदी वैट लगता था।
एसेसमेंट ईयर 2007-08 और 2008-09 के लिए हमदर्द ने 4 फीसदी वैट दिया। उसकी दलील थी कि रूह अफजा रियायत वाले दायरे में आता है। लेकिन कर अधिकारियों का तर्क था कि इस पर ज्यादा वैट लगना चाहिए। हमदर्द ने पहले अपीलेट अथॉरिटी और कमर्शियल टैक्स ट्रिब्यूनल में अपील की लेकिन उसे नाकामी हाथ लगी। जुलाई 2018 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हमदर्द की याचिका का खारिज करते हुए ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराया। हाई कोर्ट ने कहा कि आम बोलचाल में रूह अफजा को फ्रूट ड्रिंक के बजाय शरबत समझा जाता है।














