सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी की मुख्य वजह भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियां हैं। इस कारण निवेशक सेफ हेवन के रूप में सोने और चांदी का रुख कर रहे हैं। साथ ही कई देशों के केंद्रीय बैंक जमकर सोने की खरीदारी कर रहे हैं। इस कारण भी सोने की कीमत में तेजी आई है। दूसरी ओर चांदी का इंडस्ट्रियल यूज लगातार बढ़ रहा है।
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क्या करें निवेशक?
सवाल यह है कि जब सोने और चांदी की कीमत इतनी बढ़ गई है तो नए निवेशकों के लिए इनमें निवेश करना चाहिए या नहीं? साथ ही, क्या मौजूदा निवेशकों को मुनाफा बुक करके बाहर निकल जाना चाहिए या उन्हें कीमतों में और बढ़ोतरी का इंतजार करना चाहिए? मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपनी रिपोर्ट ‘कमोडिटीज रिव्यू 2025 एंड प्रीव्यू 2026’ में कहा है कि 2026 एक बड़े बदलाव का साल होने की संभावना है।
MOSFL की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की शुरुआत में सोने और चांदी अपनी रणनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की उम्मीद है। केंद्रीय बैंकों और निवेशकों की निरंतर मांग, सीमित खदान आपूर्ति वृद्धि और अपेक्षाकृत स्थिर स्क्रैप प्रवाह से इसे सपोर्ट मिलेगा। भौतिक बाजार में तंगी बने रहने की आशंका है, जो कीमती धातुओं को दीर्घकालिक पोर्टफोलियो एंकर के रूप में मजबूत करेगा। निकट भविष्य में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं, इसलिए सोने और चांदी की कीमतें निकट भविष्य में ऊंची बनी रहने की उम्मीद है।
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कहां जाएगी कीमत?
जानकारों का कहना है कि सोने और चांदी को दीर्घकालिक निवेश विकल्प के रूप में देखते हुए, किसी को किश्तों में निवेश करने या मासिक आधार पर एसआईपी निवेश पर विचार करना चाहिए। मौजूदा निवेशक वर्तमान स्तरों पर 40-50% तक मुनाफा बुक करने पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।












