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  • रेयर अर्थ के लिए अमेरिका में ‘महागठबंधन’, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान समेत जुटेंगे 20 दिग्गज देश, चीन की उड़ी नींद

    वॉशिंगटन: भारत के विदेश मंत्री अमेरिका में क्रिटिकल मिनरल्स पर होने वाली बैठक में शामिल होंगे। अमेरिका के नेतृत्व में दुर्लभ खनिजों से चीन के वर्चस्व को मिटाने के लिए Pax Silica का गठन किया गया है, जिसमें भारत शामिल होगा। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्गियो गोर ने पिछले महीने नई दिल्ली में कहा


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    By Azad Hind Desk फरवरी 2, 2026
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    वॉशिंगटन: भारत के विदेश मंत्री अमेरिका में क्रिटिकल मिनरल्स पर होने वाली बैठक में शामिल होंगे। अमेरिका के नेतृत्व में दुर्लभ खनिजों से चीन के वर्चस्व को मिटाने के लिए Pax Silica का गठन किया गया है, जिसमें भारत शामिल होगा। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्गियो गोर ने पिछले महीने नई दिल्ली में कहा था कि फरवरी में भारत को पैक्स सिलिका में शामिल होने का न्योता दिया जाएगा। अमेरिका में ये बैठक स्थानीय समय के मुताबिक 2-4 फरवरी तक होने वाली है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में 2 फरवरी को जारी एक बयान में कहा कि विदेश मंत्री जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की तरफ से बुलाई गई ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ में हिस्सा लेंगे।

    वॉशिंगटन में होने वाली बैठक में अमेरिका के अलावा भारत, यूरोपीय यूनियन, UK, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हो रहे हैं। इस दौरान जरूरी मिनरल्स पर एक स्ट्रैटेजिक गठबंधन पर चर्चा की जाएगी। खास बात ये है कि जिस पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप को दुर्लभ खनिज निकालने का न्योता दिया था, उसे इसमें शामिल नहीं किया गया है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने पिछले साल ट्रंप को क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर ऑपर दिया था, जिसके बाद दोनों देशों ने एक समझौता भी साइन किया था।

    पैक्स सिलिका के जरिए ट्रंप सुधार पाएंगे सहयोगियों से संबंध?
    पैक्स सिलिका की बैठक में वो देश शामिल हो रहे हैं, जिनके अमेरिका से रणनीतिक और सहयोगी संबंध रहे हैं। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने करीब करीब सभी के साथ अमेरिका के संबंध खराब कर लिए हैं। ऐसे में पैक्स सिलिका सम्मेलन को ट्रांसअटलांटिक संबंधों को सुधारने और चीन से जोखिम कम करने के लिए रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें खास तौर पर स्टील पर केंद्रित एक गठबंधन भी शामिल है। ऑस्ट्रेलिया ने शुक्रवार को कहा है कि वह 1.2 बिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर की लागत से मिनरल्स को लेकर एक स्ट्रैटेजिक रिजर्व बनाएगा, ताकि चीन से होने वाली सप्लाई चेन की रूकावट के असर को कम किया जा सके। पिछले अप्रैल से चीन ने ट्रंप के “लिबरेशन डे” टैरिफ के जवाब में अमेरिका को भी रेयर अर्थ्स के एक्सपोर्ट पर रोक लगा रखी है।

    पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन का एजेंडा क्या है?
    पिछले एक महीने के अंदर इस मामले पर दूसरा शिखर सम्मेलन है, जिसमें G7 देशों, जैसे UK, US, जापान, फ्रांस, जर्मनी, इटली और कनाडा के साथ-साथ भारत, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और शायद अर्जेंटीना समेत करीब 20 देश शामिल होंगे।

    • बैठक का प्राथमिक एजेंडा सेमीकंडक्टर, AI, दुर्लभ खनिजों की सप्लाई चेन पर चीन की निर्भरता को काफी कम करना है।
    • अमेरिका की कोशिश अपने सहयोगी और भरोसेमंद देशों के साथ मिलकर एक नया इको-सिस्टम बनाने की है।
    • लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ खनिज की माइनिंग, प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर बात की जाएगी।
    • इसके जरिए सदस्य देशों में सेमी-कंडक्टर चिप निर्माण और डिजाइन को बढ़ावा देने पर बातचीत होगी।
    • डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग पावर और एआई हार्डवेयर के लिए एक साझा नेटवर्क बनाने पर बात होने की संभावना है।
    • इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरी और स्वच्छ ऊर्जा के उपकरणों के लिए खनिजों की उपलब्धता पर चर्चा की जाएगी।

    लेकिन इसको लेकर एक बड़ा विवाद भी है। चर्चा का एक मुद्दा ये भी होगा कि अमेरिका से इस बात की गारंटी मांगी जाएगी की जरूरी मिनरल्स और दुर्लभ खनिजों के लिए एक न्यूनतम कीमत हो। जबकि ट्रंप प्रशासन ने इस मांग को खारिज किया है। इससे ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाजार में भारी गिरावट भी दर्ज की गई है। ऑस्ट्रेलिया खुद को चीन के विकल्प के तौर पर जरूरी मिनरल्स तैयार कर रहा है और उसने एंटीमनी और गैलियम जैसे तत्वों का स्टॉक करने का फैसला किया है। ऑस्ट्रेलिया, जापान के नक्शेकदम पर चल रहा है, ताकि अगर कभी चीन क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन बंद कर दे, फिर भी उसके पास अगले कई सालों के लिए भंडार बना रहे।

    अमेरिकी विदेश विभाग ने इस शिखर सम्मेलन से पहले एक बयान में कहा है कि “इंटरनेशनल पार्टनर्स के साथ क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन को मजबूत करना, अमेरिकी अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, टेक्नोलॉजिकल लीडरशिप और एक मजबूत एनर्जी भविष्य पर बातचीत बहुत जरूरी है।” जबकि द गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में यूरोपीयन यूनियन के सूत्रों के हवाले से कहा है कि अगर ये शिखर सम्मेलन कामयाब रहता है तो एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो इसे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए एक मील का पत्थर माना जाएगा।

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