Supreme Court ने दिया ये निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से पेश वकील से यह भी कहा कि एक ऐसा मोबाइल ऐप बनाएं, जिसके जरिए लोग NH पर आवारा पशुओं की मौजूदगी की सूचना दे सकें। कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को स्टेट हाइवे, नैशनल हाइवे और एक्सप्रेसवे से सभी आवारा जानवरों को हटाने के निर्देश दिए थे।
DOGS को लेकर एक्शन पर असंतोष
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पी. बी. पारदीवाला की बेंच ने आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने NHAI से एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित करने को भी कहा है, ताकि आम लोग हाइवे पर आवारा पशुओं की मौजूदगी की सूचना दे सकें और दुर्घटनाओं को रोका जा सके। सुनवाई के दौरान बेंच ने पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया।
CSVR प्रणाली को लागू करना असंभव
जस्टिस मेहता ने कहा कि यदि इस समस्या का समाधान आज नहीं किया गया, तो कुत्तों की संख्या प्रतिवर्ष 10-15 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जिससे स्थिति और विकराल हो जाएगी। राजस्थान सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जब नसबंदी केंद्रों और फेंसिंग की जानकारी दी, तो कोर्ट ने उनके हलफनामे की कमियों को उजागर किया। बेंच ने कहा कि पूरे राज्य में आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए केवल 45 वाहन हैं, जबकि अकेले जयपुर जैसे शहर के लिए कम से कम 20 वाहनों की जरूरत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त बजट, वाहन और जनशक्ति के बिना ‘पकड़ना, नसबंदी, टीकाकरण और छोड़ना’ (CSVR) प्रणाली को लागू करना असंभव है।
NHAI और AWBI ने क्या कहा
NHAI के वकील ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि वे ऐप विकसित करने और गौशालाओं की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाइवे पर 1300 से अधिक संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है। वहीं, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) ने बताया कि नसबंदी केंद्रों के लिए 250 से अधिक आवेदन लंबित हैं। इस पर कोर्ट ने AWBI को निर्देश दिया कि वे लंबित आवेदनों पर शीघ्र निर्णय लें।













