यहां हम लेकर आए हैं रोहित शेट्टी के बचपन और करियर के शुरुआती दौर की कहानी, जब उन्हें आम लड़कों की तरह स्ट्रगल करना पड़ा था। रोहित शेट्टी काफी छोटे थे जब पिता का साया सिर से उठ गया। रोहित अपने घर के हालात को छोटी उम्र से ही समझने लगे थे और परिवार की जिम्मेदारियां खुद ही उन्होंने कंधों पर ले ली।
पिता के निधन के बाद तीन-तीन शिफ्ट में करने लगे थे काम
रोहित ने काफी मेहनत करनी शुरू की और बताया जाता है कि दिन में तीन शिफ्ट में वो काम किया करते थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘ लोगों को लगता है कि मैंने स्ट्रगल नहीं किया है। आम स्ट्रगलर्स की तरह मैंने भी धक्के खाए हैं लेकिन कभी रुका नहीं। कई बार ठोकर लगने पर डर महसूस हुआ, फिर भी आगे बढ़ता गया।’
रोहित शेट्टी को 35 रुपये मिली थी फीस
आज रोहित शेट्टी बॉलीवुड के शानदार एक्शन डायरेक्टर कहे जाते हैं और उन्हें ‘गोलमाल’, ‘ऑल द बेस्ट’ और ‘सिंघम’ जैसी शानदार फिल्मों के लिए जाना जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि उनकी लाइफ में एक ऐसा भी समय था जब उन्हें फीस के तौर पर केवल 35 रुपए मिले थे।
रोहित शेट्टी ने कहा- घर पर हमेशा फिल्मी माहौल रहता था
रोहित ने बताया था कि पिता की मौत के बाद जब घर के हालात बिगड़ने लगे तो उन्होंने कमाना शुरू किया था। डायरेक्टर ने बताया कि उन्होंने अपने पिता को देखकर ही फिल्मों में आने का फैसला किया था। रोहित ने कहा था, ‘मेरा बचपन आम बच्चों की तरह ही बीता। मेरे पिता फिल्मों में बतौर स्टंट डायरेक्टर काम करते थे। कुछ फिल्मों में उन्होंने एक्टिंग भी की थी। उस वक्त इंडस्ट्री में उनका बहुत नाम था। घर पर हमेशा फिल्मी माहौल रहता था।’
‘पापा की मौत के बाद सब कुछ बदल गया’
रोहित ने बताया था कि पापा के साथ जब कभी वो बाहर जाते तो वहां पर भी बस फिल्मों से जुड़ी बातें सुनने को मिलती थीं। यही वजह रही कि इस दुनिया के अलावा किसी दूसरी दुनिया से परिचय ही नहीं हुआ। मैंने बचपन में ही ठान लिया था कि पापा जो काम कर रहे हैं, वही मैं भी करूंगा। लेकिन पापा की मौत के बाद सब कुछ बदल गया। मेरी उम्र कम थी, जब वो गुजर गए। वक्त के साथ परिवार की माली हालत भी खराब हो गई थी। इसी कारण मैंने बहुत जल्दी काम करना शुरू कर दिया। वहीं जुनून भी था कि फिल्मों की दुनिया में ही बेहतर काम करना है।’
कई बार भीषण गर्मियों में भी कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता
रोहित तब केवल 17 साल के थे जब उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा। पिता की वजह से लोग रोहित को जानते जरूर थे लेकिन उन्हें भी काम पाने के लिए उतनी ही जद्दोजहद करनी पड़ी थी। कई बार तो ऐसा हुआ कि उनके पास बिल्कुल पैसे नहीं रहते थे। पैसों की तंगी के कारण कई बार भीषण गर्मियों में भी कई किलोमीटर पैदल और लोकल ट्रेन से सफर किया करते थे। कई बार खाने के लिए भी कॉम्प्रोमाइज करना पड़ता था।
रोहित शेट्टी बोले- आम स्ट्रगलर्स की तरह मुझे भी संघर्ष करना पड़ा
अपने उस स्ट्रगल पर बातें करते हुए उन्होंने कहा था, ‘मैंने 17 साल की उम्र में काम करना शुरू कर दिया था। शुरुआत में ही मन बना लिया था कि या तो एक्शन डायरेक्टर बनूंगा या फिर डायरेक्टर। इतने लंबे सफर में आम स्ट्रगलर्स की तरह मुझे भी संघर्ष करना पड़ा। मुझे बाकियों के जैसे ही काम पाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े। पहली फिल्म बनाई, जो खास अच्छी नहीं चली। फिर गोलमाल बनाई, जिसने इतिहास रच दिया। मैंने अब तक 16 फिल्में बनाईं हैं। शायद कोविड न आता तो और भी बन जातीं (हंसते हुए)..।’
रोहित ने स्ट्रगल और मेहनत करना नहीं छोड़ा
रोहित शेट्टी ने करियर की शुरुआत में फिल्मी सितारों के कपड़े भी प्रेस किए। रोहित ने करियर की शुरुआत बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर से की थी। उनकी पहली कमाई महज सिर्फ 35 रुपए थे। हालांकि, इसके बाद भी रोहित ने स्ट्रगल और मेहनत करना नहीं छोड़ा। उन्हें दूसरे छोटे काम भी करने पड़े, जो उन्होंने किए भी। उन्होंने एक्ट्रेस की साड़ियों को प्रेस करने का काम किया। इतना ही नहीं, उन्होंने कुछ समय के लिए स्पॉटबॉय का भी काम किया
‘असिस्टेंट डायरेक्टर को हर छोटे काम करने ही पड़ते हैं’
उन्होंने अपनी ये कहानी सुनाते हुए कहा था, ‘हां, ये सच है। क्या होता है कि असिस्टेंट डायरेक्टर को हर छोटे काम करने ही पड़ते हैं। दूसरा यह है कि उस समय किसी भी फिल्म का बजट बहुत ज्यादा नहीं होता था। यूनिट छोटी होती थी। इसी कारण हर एक असिस्टेंट को बहुत से काम करने पड़ते थे। सिर्फ मैंने ही नहीं, कइयों ने इस तरह का काम किया है। उस वक्त किसी काम को कम करके नहीं आंका जाता था। एक्ट्रेस की साड़ी प्रेस करने से लेकर हर तरह के काम किए जाते थे।’
‘गोलमाल’ से बदली रोहित की किस्मत
अजय देवगन ने ‘दिल क्या करे’ और ‘राजू चाचा’ जैसी फिल्मों के साथ अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू किया था और रोहित भी उनसे जुड़े। रोहित अजय के साथ मिलकर असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करने लगे। ‘राजू चाचा’ बड़े बजट की फिल्म थी लेकिन ये फिल्म ज्यादा चल नहीं पाई। अजय देवगन को इससे काफी नुकसान हुआ। इस वजह से दो साल के लिए अजय और रोहित को प्रोडक्शन हाउस बंद करना पड़ा। उन्होंने सारे कर्ज लौटाने के बाद ‘जमीन’ में साथ मिलकर डायरेक्शन किया।
‘मैं करियर की शुरुआत में इंडस्ट्री में सेटल नहीं था’
रोहित ने 2003 की फिल्म ‘जमीन’ से डायरेक्शन की दुनिया में कदम रखा। हालांकि, ये फिल्म भी नहीं चली थी और रोहित की लिस्ट में लगातार फ्लॉप फिल्में शामिल हो गईं। हालात ऐसे बन गए कि अब कई डायरेक्टर और एक्टर रोहित के साथ काम करने से कतराने लगे थे। इस बारे में रोहित ने कहा, ‘यह तो बहुत लाजमी है कि जब फिल्म नहीं चलती है तो बुरा तो लगता है। फिर दूसरी फिल्म बनाते वक्त मन में बहुत तरह के सवाल होते हैं। मन में यह भी सवाल रहते हैं कि कोई प्रोड्यूसर-एक्टर आपके साथ काम करेगा या नहीं।’ रोहित ने पहली फिल्म ‘जमीन’ की रिलीज के बाद एक-डेढ़ साल स्क्रिप्ट पर काम चला। इसके बाद रिलीज हुई ‘गोलमाल’ ने पूरी दुनिया ही पलट दी। उन्होंने कहा था, ‘मैं करियर की शुरुआत में इंडस्ट्री में सेटल नहीं था और इसी वजह से कुछ खोने को भी नहीं था। मेरा मकसद बस कम बजट की कॉमेडी फिल्मों से लोगों को जोड़ पाऊं।’
‘सिंबा’ बनाते वक्त कॉप यूनिवर्स का खयाल आया
रोहित हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पहले फिल्ममेकर हैं, जिन्होंने फिल्मों में यूनिवर्स का कॉन्सेप्ट ईजाद किया। वो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पहले फिल्ममेकर बने, जो यूनिवर्स वाला कॉन्सेप्ट लेकर आए। उन्होंने कहा था, ‘2016 तक मेरे मन में इस तरह का कोई ख्याल नहीं था। सिंघम, सिंघम रिटर्न तक इसका ख्याल नहीं आया था, लेकिन फिल्म सिंबा बनाते वक्त यह ख्याल आया कि हम कॉप यूनिवर्स जैसा कुछ बना सकते हैं। खुशकिस्मती रही कि हमारी यह सोच कामयाब रही।’
रोहित शेट्टी की नेटवर्थ
रोहित शेट्टी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े डायरेक्टर में शामिल हैं। कभी 35 रुपए सैलरी पाने वाले रोहित की कुल नेटवर्थ करीब 336 करोड़ रुपए है। लाइफ स्टाइल एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पास लेम्बोर्गिनी, मासेराटी ग्रैन टूरिज्मो, रेंज रोवर वो, BMW X6 स्पोर्ट और फोर्ड मस्टैंग जीटी जैसी महंगी गाड़ियां भी हैं। इन सबके अलावा रोहित का नवी मुंबई में एक आलीशान घर है, जिसे उन्होंने साल 2013 में खरीदा था। जुहू में भी उनके पास 10 मंजिली इमारत है जिसपर हाल ही में फायरिंग की घटना घटी है। .













