बेंगलुरु के वैभव अग्रवाल टेक इंजीनियर हैं। उनका मानना है कि लाइफस्टाइल सफलता की कहानी कुछ और ही कहती है। उन्होंने लिंक्डइन पर अपनी बात रखी। उन्होंने बेंगलुरु में 45 लाख रुपये सालाना की सैलरी की तुलना लंदन में 1,08,000 पाउंड (करीब 1.31 करोड़ रुपये) की सैलरी से की। उन्होंने समझाया कि सिर्फ पैसों के आंकड़े देखकर यह नहीं पता चलता कि दोनों शहरों में रहने, आने-जाने और रोजमर्रा की जिंदगी कितनी अलग है। उनकी इस बात पर दुनिया भर के इंजीनियरों और विदेश में रहने वाले भारतीयों के बीच खूब चर्चा हुई।
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क्या बताई कैलकुलेशन
वैभव अग्रवाल ने बताया कि बेंगलुरु में 45 लाख की सैलरी टैक्स कटने के बाद हर महीने करीब 2.7 लाख रुपये बनती है। वहां एक अच्छे 2BHK फ्लैट का किराया करीब 50,000 रुपये है। वहीं घर के रोजमर्रा के काम जैसे किराने का सामान लाना, खाना बनाना, सफाई और आने-जाने का खर्च, ये सब अगर किसी और से करवाएं तो लगभग 8,000 रुपये और लग सकते हैं। बेंगलुरु में जो लोग इस तरह से रहते हैं, वे शहर के टॉप 1% लोगों में गिने जाते हैं। वे आराम से और बिना किसी झंझट के जिंदगी जीते हैं, उन्हें छोटे-मोटे कामों की चिंता नहीं करनी पड़ती।
इसके मुकाबले लंदन में 1,08,000 पाउंड (करीब 1.31 करोड़ रुपये) की सैलरी टैक्स और नेशनल इंश्योरेंस कटने के बाद हर महीने करीब 6100 पाउंड (करीब 7.41 लाख रुपये) बनती है। लंदन में जोन 2 में एक ठीक-ठाक 1BHK का किराया करीब 2200 पाउंड (करीब 2.67 लाख रुपये) है। वहां खाना बनाने से लेकर सफाई तक, ज्यादातर काम खुद ही करने पड़ते हैं। घर के काम के लिए मदद मिलना बहुत मुश्किल और महंगा है। इसका मतलब है कि लंदन में अच्छी सैलरी वाली नौकरी करने के बावजूद, आपकी जिंदगी एक आम अपर-मिडिल क्लास जैसी ही होती है, न कि बहुत आरामदायक और लग्जरी वाली।
कितना है दोनों शहर में अंतर?
वैभव अग्रवाल ने इसे बहुत ही सरल तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु आपको लग्जरी और आराम देता है, जबकि लंदन आपको दुनियादारी का अनुभव, साफ हवा और मजबूत करेंसी देता है। अगर आप एक शहर से दूसरे शहर जाने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ पैसों को रुपये में न बदलें। बल्कि, एक लाइफस्टाइल की तुलना दूसरे लाइफस्टाइल से करें।
लोगों ने क्या दी राय?
इंटरनेट पर लोगों ने भी इस बातचीत में हिस्सा लिया। उन्होंने सैलरी और लाइफस्टाइल के बीच के फायदे-नुकसान बताए। कई लोगों ने कहा कि लंदन में भले ही दुनियादारी का अनुभव, साफ हवा और अच्छी व्यवस्थाएं हों, लेकिन वहां रोजाना खाना बनाना, सफाई करना, लंबा सफर तय करना और दिन की रोशनी कम मिलना जैसी दिक्कतें हैं।
वहीं भारत में आप काम आउटसोर्स करके (दूसरों से करवाकर) आराम पा सकते हैं। यहां सामान की डिलीवरी आसानी से हो जाती है और सामाजिक सुविधाएं भी हैं। इससे लोगों को समय बचता है और वे आराम से जिंदगी जी पाते हैं। कुल मिलाकर, लोगों का मानना है कि सिर्फ सैलरी की तुलना करना गलत है। असली मायने में लाइफस्टाइल, रोजमर्रा के समझौते और आपकी अपनी प्राथमिकताएं क्या हैं, यह ज्यादा जरूरी है।












