बड़े शेयरों में बिकवाली का दबाव
इंडेक्स के बड़े और अहम शेयरों में लगातार हो रही बिकवाली ने बाजार को नीचे खींचने में बड़ी भूमिका निभाई है। बुधवार को एचडीएफसी बैंक के शेयर 1.7% गिर गए, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 0.4% नीचे आ गए। ट्रेंट के शेयर में 1.4% की गिरावट आई। इससे एक दिन पहले ट्रेंट के शेयरों में 8.6% गिरावट आई थी जबकि रिलायंस का शेयर 5 फीसदी गिर गया था। बड़े शेयरों में गिरावट का असर बाजार पर दिखा था।
Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, डॉ. वी. के. विजयकुमार ने कहा कि हाल के दिनों में बाजार में कोई साफ ट्रेंड या दिशा नहीं दिख रही है। कुछ बहुत बड़े शेयरों में होने वाली हलचल पूरे बाजार को बहुत ज्यादा प्रभावित कर रही हैं। मंगलवार को संस्थागत खरीदारों की अच्छी खरीदारी के बावजूद निफ्टी 71 अंक नीचे चला गया। इसका मुख्य कारण Reliance और HDFC बैंक के शेयरों में आई भारी गिरावट थी। इन दोनों शेयरों में डेरिवेटिव और कैश मार्केट में बड़े वॉल्यूम में हुई ट्रेडिंग से पता चलता है कि यह सेटलमेंट डे से जुड़ी गतिविधि हो सकती है।
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वेनेज़ुएला में राजनीतिक तूफान
वेनेज़ुएला में राजनीतिक उथल-पुथल और वहां के पेट्रोलियम भंडार को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक बाजार में निवेशकों के भरोसे को हिला दिया है। यह संकट तब और बढ़ गया जब 3 जनवरी को अमेरिका ने एक सैन्य कार्रवाई की। इस कार्रवाई के बाद अमेरिकी विशेष बलों ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को राजधानी काराकस से गिरफ्तार कर लिया और उन्हें आपराधिक आरोपों का सामना करने के लिए अमेरिका ले जाया गया। मादुरो अपनी गिरफ्तारी के बाद से न्यूयॉर्क की जेल में हैं।
इन घटनाओं ने भू-राजनीति और नीतिगत जोखिमों को लेकर बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया है। डॉ. विजयकुमार ने कहा कि आगे चलकर, घटनाओं और खबरों की वजह से बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। उन्होंने साथ ही कहा कि ट्रंप के ट्वीट और उनके फैसले हमेशा बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। ट्रंप की टैरिफ नीति पर बहुत जल्द कोर्ट का फैसला आ सकता है। अगर यह फैसला टैरिफ के खिलाफ जाता है, तो शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल मच जाएगी।
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कमजोर संकेत और एशिया में बिकवाली
भारतीय बाजार भी एशिया के बाजारों में आई गिरावट के साथ-साथ नीचे आए। एशिया में शेयर इसलिए गिरे क्योंकि निवेशक वेनेज़ुएला संकट के असर और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता से जूझ रहे थे। जापान के शेयर बाजारों में गिरावट ने क्षेत्रीय बाजारों को नीचे खींचा। हालांकि औद्योगिक धातुओं में तेजी के बाद कमोडिटी से जुड़े शेयरों को कुछ सहारा मिला।
टोक्यो के शेयर बाजारों पर दबाव तब आया जब चीन ने जापान को दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। इनका इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। यह चीन का नवीनतम कदम था, जो जापानी प्रधानमंत्री की ताइवान पर की गई टिप्पणियों के बाद आया है। वैश्विक बाजारों में छाई सतर्कता का असर घरेलू बाजारों पर भी पड़ा।
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कंसॉलिडेशन और उतार-चढ़ाव का जोखिम
टेक्निकल इंडिकेटर्स बताते हैं कि हालिया गिरावट लंबी अवधि के ट्रेंड में बड़ी गिरावट के बजाय एक व्यापक सुधार या कंसॉलिडेशन का हिस्सा है। हालांकि, निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव का जोखिम बना हुआ है। Emkay Global के हेड–बिजनेस डेवलपमेंट–इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज, जयकृष्ण गांधी ने कहा कि 1991 से निफ्टी ने सात बड़ी तेजी वाले चक्र देखे हैं। इनमें से ज्यादातर तेजी 40-55 महीनों तक चली है, जिसके बाद कंसॉलिडेशन का दौर आया।
उन्होंने बताया कि 2009 के बाद, इन सुधारों में तेा गिरावट की बजाय समय के साथ स्थिरता ज्यादा देखने को मिली है, जो बाजार की मज़बूत संरचना को दर्शाता है। गांधी ने कहा कि इंडेक्स ने हाल ही में लगभग 1-1.5 साल का कंसोलिडेशन टाइम पूरा किया है, जिसके बाद ऐतिहासिक रूप से तेी का दौर फिर से शुरू होता है। इसके 28,500 तक ऊपर जाने की संभावना है, जबकि 25,500-25,300 के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है। सेक्टर के लिहाज से, गांधी ने फार्मा सेक्टर में मजबूती की ओर इशारा किया।












