इसका सीधा असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। इससे लोन महंगे हो सकते हैं या फिर RBI की तरफ से ब्याज दरें कम होने का फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाएगा। इसलिए आने वाले समय में बैंकों को अपना डिपॉजिट्स बढ़ाने के लिए और बेहतर तरीके खोजने होंगे। देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर HDFC बैंक की बात करें तो पिछले तिमाही में उसके लोन 12% बढ़े जबकि डिपॉजिट्स सिर्फ 11.5% बढ़ीं। इस वजह से HDFC बैंक का LDR फिर से 100% के करीब पहुंच गया है। दिसंबर के अंत तक HDFC बैंक के कुल लोन ₹28.44 लाख करोड़ थे, जो कुल डिपॉजिट्स ₹28.59 लाख करोड़ से थोड़े ही कम हैं।
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सरकारी बैंकों का हाल
पूरे बैंकिंग सिस्टम में भी यही हाल है। क्रेडिट ग्रोथ यानी लोन बांटने की रफ्तार डिपॉजिट्स बढ़ने की रफ्तार से काफी तेज है। बैंक ऑफ बड़ौदा के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में उनके ग्लोबल एडवांसेस (लोन) 14.57% बढ़कर ₹13.44 लाख करोड़ हो गए जबकि ग्लोबल डिपॉजिट्स सिर्फ 10.25% बढ़कर ₹15.47 लाख करोड़ रह गए। इसी तरह पंजाब नेशनल बैंक ने बताया कि उनके ग्लोबल डिपॉजिट्स 8.5% बढ़कर ₹16.6 लाख करोड़ हुए, जबकि ग्लोबल एडवांसेस 11% बढ़कर ₹12.32 लाख करोड़ रहे।
इसी तरह यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में ग्लोबल डिपॉजिट्स सिर्फ 3.4% बढ़कर ₹12.22 लाख करोड़ हुए, जबकि लोन ग्रोथ 7.13% रही और एडवांसेस ₹10.16 लाख करोड़ रहे। Bernstein के इंडिया फाइनेंशियल हेड, प्रणव गुंडलपल्ले कहते हैं, “लोन की मांग में सुधार और करंट अकाउंट तथा सेविंग अकाउंट जमाओं में बढ़ोतरी अच्छी बात है। लेकिन, कुल जमाओं की ग्रोथ उम्मीद से कमजोर बनी हुई है। बैंक का मैनेजमेंट FY27 तक LDR को 90% तक लाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इस लक्ष्य को पाने के लिए मार्च तिमाही में जमाओं में अच्छी बढ़ोतरी और FY27 तक इसमें लगातार सुधार की जरूरत होगी।”
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प्राइवेट बैंकों की स्थिति
प्राइवेट बैंकों में Axis बैंक के ग्रॉस एडवांसेस 14.1% बढ़कर ₹11.70 लाख करोड़ हुए जबकि डिपॉजिट्स 15% बढ़कर ₹12.60 लाख करोड़ रहे। Kotak Mahindra Bank के नेट एडवांसेस 16% बढ़कर ₹4.80 लाख करोड़ पहुंच गए और डिपॉजिट्स 14.6% बढ़कर ₹5.42 लाख करोड़ हो गए। Yes Bank में दिसंबर तिमाही में एडवांसेस 5.2% बढ़कर ₹2.57 लाख करोड़ हुए, जबकि डिपॉजिट्स थोड़ी तेज रफ्तार से 5.5% बढ़कर ₹2.92 लाख करोड़ हुए।
RBL बैंक ने बताया कि उनके डिपॉजिट्स 12% बढ़कर ₹1.19 लाख करोड़ हुए, जो कि एडवांसेस में 13% की बढ़ोतरी (₹1.04 लाख करोड़) के लगभग बराबर है। IndusInd Bank के नेट एडवांसेस 13.1% घटकर ₹3.18 लाख करोड़ रह गए, जबकि डिपॉजिट्स 3.8% घटकर ₹3.94 लाख करोड़ हो गए। Macquarie Capital के इंडिया हेड-फाइनेंशियल, सुरेश गणपति का कहना है, “पूरे सिस्टम में LDR 81% से ऊपर है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। अगर यह स्थिति बनी रही, तो बैंकों को या तो डिपॉजिट्स पर ब्याज दरें बढ़ानी पड़ेंगी या फिर RBI की तरफ से ब्याज दरों में कटौती का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाने में उन्हें मुश्किल होगी। इन दोनों ही बातों पर ध्यान देने की जरूरत है।”
एनबीएफसी
नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (NBFCs) भी अपने बिजनेस में अच्छी बढ़ोतरी दिखा रही हैं। Bajaj Finance ने बताया कि दिसंबर तिमाही में उनके नए लोन की बुकिंग 15% बढ़ी और एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 22% बढ़कर करीब ₹4.85 लाख करोड़ हो गया। 31 दिसंबर तक उनकी डिपॉजिट बुक करीब ₹71,000 करोड़ थी। Poonawalla Fincorp ने AUM में 77.5% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की, जो ₹55,000 करोड़ हो गया। M&M Finance ने बताया कि दिसंबर तिमाही में उसके लोन डिस्पर्समेंट 7% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹17,600 करोड़ रहा जबकि बिजनेस एसेट्स करीब 12% बढ़कर लगभग ₹1.29 लाख करोड़ हो गए।











