आइए आपको चेतन शर्मा से जुड़ी 8 खास बातें बताते हैं-
एक ही गुरु के चेले रहे कपिल, योगराज और चेतन
चेतन शर्मा का जन्म पंजाब के लुधियाना में हुआ था, लेकिन उनकी क्रिकेट चंडीगढ़ में परवान चढ़ी थी। सेक्टर-16 स्टेडियम में मशहूर कोच देशप्रेम आजाद ने चेतन की कम हाइट के बावजूद उनकी तेज गेंदबाजी के हुनर को पहचाना और निखारा था। देशप्रेम आजाद ने ही कपिल देव और युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह को कोचिंग दी थी। चेतन शर्मा 1983 वर्ल्ड कप जीत के हीरो बल्लेबाज यशपाल शर्मा के भतीजे थे। हालांकि दोनों चाचा-भतीजे ने एकसाथ टीम इंडिया के लिए दो ही वनडे मैच खेले थे। ये दोनों मैच इंग्लैंड के खिलाफ 1984-85 में खेले गए थे, जिसमें यशपाल ने चेतन की गेंद पर कैच भी लपका था।
महज 17 साल की उम्र में किया इंटरनेशनल डेब्यू
चेतन शर्मा को महज 16 साल की उम्र में हरियाणा ने रणजी ट्रॉफी टीम में मौका दिया था। चेतन को महज 17 साल की उम्र में साल 1983 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पहला वनडे खेलने का मौका मिला। वह भारत के लिए डेब्यू करने वाले सबसे कम उम्र खिलाड़ियों में से एक हैं। इसके एक साल बाद उन्होंने 18 साल की उम्र में पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच लाहौर में खेला था।
टेस्ट मैच के डेब्यू ओवर में ही लिया विकेट
चेतन शर्मा उन गेंदबाजों में शामिल हैं, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपने डेब्यू ओवर में विकेट लिया था। चेतन शर्मा ने लाहौर टेस्ट-1984 में अपने पहले ओवर की 5वीं गेंद पर पाकिस्तानी ओपनर मोहसिन खान को आउट करके यह कारनामा किया था। ऐसा करने वाले वे महज तीसरे भारतीय गेंदबाज बने थे।
इंग्लैंड में 10 विकेट लेकर इतिहास रचा
चेतन शर्मा ने 1985-86 के इंग्लैंड दौरे पर तीसरे और आखिरी टेस्ट मैच में 10 विकेट लेकर इतिहास रचा था। यह टेस्ट मैच बर्मिंघम के एजबेस्टन ओवल में खेला गया था। टीम इंडिया सीरीज में 2-0 से जीत हासिल कर चुकी थी। इंग्लैंड की नजर एजबेस्टन टेस्ट जीतकर स्कोर 1-2 करने पर थी। इंग्लैंड ने पहले खेलते हुए 390 रन बनाए, जिसमें चेतन ने 130 रन पर 4 विकेट लिए। भारत ने भी 390 रन बनाए। दूसरी पारी में चेतन के 58 रन पर 6 विकेट ने इंग्लैंड को 235 रन पर समेट दिया। भारत 5 विकेट पर 174 रन ही बना सका और मैच ड्रॉ हो गया। चेतन का इंग्लैंड में 10 विकेट लेने का रिकॉर्ड साल 2025 तक कोई भारतीय गेंदबाज बराबर नहीं कर पाया था। 2025 में आकाशदीप सिंह ने इसकी बराबरी की थी।
वर्ल्ड कप में हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय बने
चेतन शर्मा ने रिलायंस वर्ल्ड कप 1987 में न्यूजीलैंड के खिलाफ इतिहास रच दिया था। नागपुर में खेले गए इस मैच में बुखार का बावजूद सुनील गावस्कर ने अपने वनडे करियर का इकलौता शतक लगाकर इसे यादगार बनाया था तो चेतन ने गेंदबाजी से इसे रिकॉर्ड बुक में दर्ज कर दिया था। चेतन ने इस मैच में विकेटों की हैट्रिक लगाई थी। यह वनडे मैचों में किसी भारतीय गेंदबाज की पहली हैट्रिक थी। इतना ही नहीं वर्ल्ड कप इतिहास में भी यह पहली हैट्रिक थी।
शारजाह में आखिरी गेंद पर छक्के ने बनाया विलेन
चेतन के लिए करियर में सबसे खराब पल 1986-87 में शारजाह क्रिकेट स्टेडियम में आया, जब ऑस्ट्रेलेशिया कप के फाइनल मैच की आखिरी गेंद चेतन शर्मा ने फुलटॉस फेंक दी और पाकिस्तानी बल्लेबाज जावेद मियांदाद ने उस पर छक्का मारकर इतिहास रच दिया। महज 20 साल के चेतन पूरे भारत में खलनायक बन गए। बाद में उन्होंने खुद साझा किया था कि कई महीने तक उन्हें मुंह छिपाकर घूमना पड़ा था। इस एक ‘गेंद’ ने उनके पूरे करियर की बेहतरीन उपलब्धियों को हमेशा के लिए छिपा दिया।
शतक बनाकर चौंकाया, फिर करियर 23 की उम्र में खत्म
चेतन शर्मा ने बल्लेबाज के तौर पर भी सभी को तब चौंकाया था, जब उन्होंने 1989-90 में MRF वर्ल्ड सीरीज (नेहरू कप) के कानपुर में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए मैच में उन्होंने बेहतरीन शतक ठोक दिया था। चौथे नंबर पर उतरे चेतन ने 96 गेंद में 8 चौकों व 1 छक्के से नॉटआउट 101 रन बनाए और टीम को जीत दिला दी। इसके बावजूद उनका करियर महज 23 साल की उम्र में इसी साल खत्म हो गया। हालांकि उन्हें 5 साल बाद फिर से वनडे टीम में बुलाया गया, लेकिन तब तक उनका बेहतरीन दौर बीत चुका था। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ जयपुर में आखिरी वनडे मैच खेला था।
चीफ सलेक्टर बने और विवादों में फंस गए
चेतन शर्मा कुछ साल पहले भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ सलेक्टर भी बने थे, लेकिन फरवरी, 2023 में एक चैनल के स्टिंग ऑपरेशन ने उन्हें विवादों में फंसा दिया। उन्होंने कई स्टार प्लेयर्स के पूरी तरह फिट नहीं होने के बावजूद खेलने और डोप टेस्ट में पकड़ नहीं आने वाले इंजेक्शन लगाने का दावा कर दिया। साथ ही उन्होंने विराट कोहली और सौरव गांगुली के बीच अहम की लड़ाई होने की भी बात कही। ऐसे ही कई दावों पर उठे विवाद के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। चेतन शर्मा ने 23 टेस्ट मैच में 61 विकेट लेने के साथ ही 354 रन भी बनाए थे, जबकि 65 वनडे मैच में 67 विकेट के साथ 456 रन उनके खाते में दर्ज हुए थे।














