वानुआतु का नागरिक है। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि ‘इस तरह का कोई देश नहीं है’। आरोपी ने कलकत्ता हाई कोर्ट से जमानत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी और इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस ए. वी. अंजरिया की बेंच ने सुनवाई की।
वानुआतु पर सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ
बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार आरोपी की ओर से पेश हुए सीनियर वकील सिद्धार्थ दवे ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि याचिकाकर्ता करीब एक साल तीन महीने से जेल में बंद है। इसपर बेंच ने आरोपी से पूछा कि ‘आप किस देश के नागरिक हैं।’ इसपर उसके वकील ने बताया कि याचिकाकर्ता वानुआतु के नागरिक हैं। तब जस्टिस संदीप मेहता ने पूछा ‘क्या आप वहां गए हैं?’ जब आरोपी के वकील ने कहा कि नहीं, तो जज ने कहा, ‘इस तरह का कोई देश नहीं है। हम कैलासा जैसे एक देश के बारे में भी जानते हैं। उसी जैसा है।’
आरोपी ने क्यों वापस ली याचिका
याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि उसे चार अन्य मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसके बाद बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार की पैरवी कर रहे वकील से पूछा कि उन्हें ट्रायल पूरी करने में कितना समय लगेगा। सरकारी वकील ने जवाब दिया कि 6 से 8 महीने ट्रायल पूरी हो जाने की संभावना है। इसपर याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी और बेंच ने कहा याचिका’वापस लिए जाने के कारण खारिज’ की जाती है।
वानुआतु देश कहां है
वानुआतु दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक देश है। यह ऑस्ट्रेलिया के पूरब और न्यू कैलेडोनिया के उत्तर-पूर्व में है। वानुआतु 80 द्वीपों की एक श्रृंखला है, जिसे पहले न्यू हेब्राइड्स के नाम से जाना जाता था। 1980 में यह फ्रांस और ब्रिटेन के कब्जे से मुक्त हुआ। इसके ज्यादातर द्वीपों पर आबादी है और कुछ पर सक्रिय ज्वालामुखी हैं। यह पहाड़ियों से भरा देश है और इसका ज्यादातर क्षेत्र वर्षा वनों से भरा है। पोर्ट विला यहां की राजधानी है और अक्टूबर 2023 तक यहां की आबादी तीन लाख से अधिक थी।
‘कैलासा’ देश कहां है
कैलासा एक कथित स्वयंभू हिंदू राष्ट्र है। 2019 में भगोड़े भारतीय गुरु नित्यानंद ने इसकी ‘स्थापना’ का दावा किया था। इसे संयुक्त राष्ट्र या किसी अन्य देश ने राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी है।













