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  • विदेशियों को नहीं भाया यह भारतीय, स्वीडन में चलती हुई कंपनी पर ताला लगाकर वापस लौटना पड़ा

    नई दिल्ली: अतिथि देवो भव… यानी मेहमान भगवान के समान होता है। यह वो लाइन है जिसका इस्तेमाल हम अपने देश आने वाले विदेशी लोगों के लिए सबसे ज्यादा करते हैं। चाहे वह पढ़ाई के लिए आए हों या घूमने या कोई कारोबार करने। कई विदेशियों ने भारत में अपना अच्छा कारोबार जमा लिया है।


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    By Azad Hind Desk फरवरी 26, 2026
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    नई दिल्ली: अतिथि देवो भव… यानी मेहमान भगवान के समान होता है। यह वो लाइन है जिसका इस्तेमाल हम अपने देश आने वाले विदेशी लोगों के लिए सबसे ज्यादा करते हैं। चाहे वह पढ़ाई के लिए आए हों या घूमने या कोई कारोबार करने। कई विदेशियों ने भारत में अपना अच्छा कारोबार जमा लिया है। वहीं कई भारतीय भी विदेशों में कारोबार की दुनिया में अच्छा नाम कमा रहे हैं। लेकिन अभिजीत नाग बालासुब्रमण्यम ( Abhijith Nag Balasubramanyam ) का अनुभव बेहद खराब रहा। उन्हें स्वीडन में अपना स्टार्टअप बंद करना पड़ा।

    अभिजीत ने स्वीडन में फूड सिक्योरिटी को मजबूत करने के उद्देश्य से स्टार्टअप शुरू किया था। लेकिन उन्हें अपना स्टार्टअप महज 11 महीनों में ही बंद करना पड़ा। भारतीय सीईओ अभिजीत का कहना है कि स्वीडन की Hostile (दुश्मन जैसा मानना) और Xenophobic (विदेशी विरोधी) इमिग्रेशन सिस्टम के कारण उन्हें अपनी कंपनी बेचकर भारत लौटना पड़ा। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब स्वीडन अपनी नागरिकता नीतियों को सख्त कर रहा है। साथ ही वहां अप्रवासियों के प्रति नफरत की भावनाएं बढ़ रही हैं।
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    लिंक्डइन पर शेयर किया अनुभव

    अभिजीत ने अपना यह अनुभव लिंक्डइन पर शेयर किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में स्वीडन के इमिग्रेशन एजेंसी पर सवाल उठाया है। उन्होंने पोस्ट में कहा कि वह स्वीडन से वापस भारत अपनी इच्छा से नहीं आए हैं। स्टार्टअप के दौरान दौरान उनका इमिग्रेशन मामला उलझता चला गया। स्वीडिश माइग्रेशन एजेंसी ने ऐसा करने के लिए उन्हें मजबूर किया। इसे स्थानीय रूप से माइग्रेशन्सवर्केट (Migrationsverket) कहा जाता है। यह एजेंसी मूल रूप से स्वीडन में रेजिडेंस और वर्क परमिट की देखरेख करती है।

    क्या काम करती थी कंपनी?

    • अभिजीत ने मई 2025 में स्वीडन में माइक्रोग्रीन्स आधारित स्टार्टअप Hydro Space Sweden AB शुरू किया था।
    • कंपनी का उद्देश्य उत्तरी स्वीडन में स्थानीय खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना और नौकरियां देना था।
    • अभिजीत के मुताबिक कारोबार को ग्राहकों से अच्छा रिस्पॉन्स भी मिल रहा था।

    माइग्रेशन एजेंसी पर गंभीर आरोप

    अभिजीत ने स्वीडन की माइग्रेशन एजेंसी Migrationsverket पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों में व्यावसायिक समझ की कमी थी, डॉक्यूमेंट प्रोसेस को लेकर स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं दिया गया और अस्वीकृति के आधार बार-बार बदले गए। उन्होंने लिखा कि यह सिर्फ एक नौकरशाही बाधा नहीं थी, बल्कि सिस्टम की अव्यवस्था और गैर-पेशेवर रवैये का उदाहरण था। अभिजीत के अनुसार, पूरी प्रक्रिया ने उनकी मानसिक सेहत पर गहरा असर डाला। उन्होंने कहा कि वे अब कानूनी लड़ाई नहीं लड़ना चाहते। उन्होंने अपनी मेंटल हेल्थ पर ध्यान देने के लिए भारत लौटने का फैसला किया।

    कड़े हो रहे हैं इमिग्रेशन नियम

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब स्वीडन में आम चुनाव से पहले आव्रजन नियमों को सख्त किया जा रहा है। हाल ही में नागरिकता के लिए न्यूनतम निवास अवधि पांच साल से बढ़ाकर आठ साल कर दी गई है। साथ ही भाषा और सांस्कृतिक ज्ञान की सख्त परीक्षा भी अनिवार्य की गई है। स्वीडन खुद को वैश्विक प्रतिभाओं और इनोवेशन के लिए अनुकूल देश के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। लेकिन अभिजीत का कहना है कि जमीनी हकीकत अलग है और ‘स्टार्टअप-फ्रेंडली’ छवि महज एक दिखावा है।

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