अमेरिका के तर्क के हिसाब से क्या ताइवान पर चीन का हमला और यूक्रेन पर रूस का हमला जायज कहा जाएगा? डोनाल्ड ट्रंप, जो बार बार दुनिया का चौधरी बनने का दावा कर रहे हैं, युद्धों को रूकवाने का दावा कर रहे हैं, क्या वो वेनेजुएला पर हमले का कोई तर्क दे पाएंगे? क्या वो कल होकर ईरान पर भी ऐसा ही हमला करेंगे? अमेरिका पर शक्ति है तो क्या वो बार बार अपने लिए सद्दाम हुसैन खोजेगा और अपनी मर्जी से मुकदमा चलाकर उसे सूली पर लटकाएगा? दुनिया के दिल में आज भी सद्दाम हुसैन इसीलिए जिंदा है।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति पर मुकदमा चलाएगा अमेरिका?
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक बयान जारी करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि ‘मादुरो अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं हैं और उनका शासन वैध नहीं है। मादुरो ड्रग्स कार्टल de Los Soles के प्रमुख हैं, जो एक नार्को आतंकी समूह है, जिसने एक देश पर कब्जा कर लिया था।’ मार्को रूबियो ने कहा है कि उनपर अमेरिका में ड्रग्स सप्लाई को लेकर मुदकमा चलाया जाएगा। वहीं, सीएनएन ने अमेरिका के एक सीनेटर माइक ली के हवाले से कहा है कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो का कहना है कि “मादुरो को अमेरिका में ट्रायल के लिए गिरफ्तार किया गया है।” रिपब्लिकन सीनेटर के मुताबिक, “अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका में ट्रायल के लिए गिरफ्तार किया है।” उहोंने कहा कि उन्होंने विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बात की है। इसीलिए बार बार सद्दाम हुसैन की याद आ रही है, जिन्हें अमेरिका ने ऐसे ही इराक पर हमला कर गिरफ्तार किया था और बाद में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों में ट्रायल के बाद फांसी दे दी थी।
अमेरिका पहले से ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो पर नार्को-आतंकवाद, ड्रग तस्करी, कोकीन तस्करी के लिए सशस्त्र समूहों को संरक्षण देने, मानवाधिकार उल्लंघन और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचलने जैसे गंभीर आरोप लगाता रहा है। अमेरिकी न्याय विभाग ने 2020 में मादुरो पर औपचारिक अभियोग लगाया था और उनकी गिरफ्तारी पर इनाम भी घोषित किया गया था। डोनाल्ड ट्रंप ने उनपर 50 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित कर दिया था। ट्रंप ने बार बार आरोप लगाया है कि मादुरो ने अमेरिका में ड्रग्स की सप्लाई को हथियार की तरह इस्तेमाल किया और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क के साथ मिलकर काम किया। हालांकि वेनेजुएला सरकार इन सभी आरोपों को राजनीतिक साजिश बताती रही है।
सद्दाम हुसैन को इराक में दी गई थी फांसी
सद्दाम हुसैन को 2003 में अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन ने इराक पर हमला कर सत्ता से हटा दिया था। बाद में उन्हें इराकी बलों ने पकड़ा और इराकी विशेष ट्राइब्यूनल में मुकदमा चलाया गया। सद्दाम पर मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप सिद्ध किए गये और 2006 में इराकी कानून के तहत फांसी दी गई। हालांकि अमेरिका ने सद्दाम हुसैन को सीधे फांसी नहीं दी थी और पूरी प्रक्रिया इराक की अंतरिम सरकार और उसकी न्याय प्रणाली के जरिए हुई थी। लेकिन क्या ये माना जा सकता है कि इसमें अमेरिका का दखल नहीं होगा? हालांकि अमेरिका आम तौर विदेशी नेताओं को फांसी नहीं देता है, बल्कि वो उन्हें अपने या अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में पेश करता है।
इसीलिए कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मादुरो अमेरिका में मुकदमे का सामना करते हैं, तो उन्हें फांसी दिए जाने की संभावना बेहद कम है। अमेरिका में ड्रग तस्करी और आतंक से जुड़े मामलों में आजीवन कारावास या लंबी सजा का प्रावधान है, लेकिन किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को मृत्युदंड देना कानूनी और कूटनीतिक रूप से अत्यंत विवादास्पद होगा।














