10 फरवरी को जारी हुआ नोटिफिकेशन
10 फरवरी को इसका नोटिफिकेशन जारी हुआ था। IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि कई देशों ने AI से बने कंटेंट की साफ लेबलिंग को जरूरी बनाने के भारत के फैसले की तारीफ की है और वे इसी तरह के उपायों पर विचार कर रहे हैं।
पीएम मोदी ने दिया था सुझाव
इन नियमों के लागू होने से एक दिन पहले यानी, गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने AI समिट में भी लेबल को लेकर सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाने के सामान पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी लेबल होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या फैब्रिकेटेड, यानी AI से बनाया गया है।
AI लेबल
जैसे खाने के पैकेट पर ‘शाकाहारी’ या ‘मासाहारी’ का लेबल होता है, वैसे हर AI विडियो, फोटो पर एक लेबल लगा होगा।
टेक्निकल मार्कर
मेटाडेटा स्क्रीन पर तो नहीं दिखता, लेकिन फाइल की कोडिग में होता है। AI के इस्तेमाल से अपराध होगा, तो ‘टेक्निकल मार्कर’ से पकड़ा जाएगा।
छेड़छाड़ पर रोक
पहले लोग AI से बनी फोटो का कोना काटकर या एडिटिंग करके उसका ‘वॉटरमार्क’ हटा देते थे। अब कंपनियों को इसपर भी ठोस कदम उठाना होगा।
चाइल्ड पोर्नोग्राफी
अगर AI का इस्तेमाल चाइल्ड पोर्नोग्राफी, अश्लीलता, धोखाधड़ी, हथियारों से जुड़ी जानकारी या किसी की नकल उतारने के लिए किया जाता है, तो इसे गभीर अपराध माना जाएगा।
‘समिट में कुछ गलत चुनाव हुए हैं’
वैष्णव ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के विवाद का बिना नाम लिए जिक्र किया। उन्होंने माना कि कुछ बुरे चुनाव हुए हैं। लेकिन सरकार तुरंत ऐसे लोगों पर एक्शन भी लिया, जिन्होंने एआई से जुड़े अच्छे काम को कमतर करने की कोशिश की।
बता दें बीते दिनों एक्सपो में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की ओर से चीनी रोबोटिक डॉग के डेमो को लेकर विवाद हुआ था। यूनिवर्सिटी ने इस प्रॉडक्ट को अपना आविष्कार बताया था। इससे जुड़ा वीडियो वायरल होने पर यूनिवर्सिटी को एक्सपो से बाहर कर दिया गया। वैष्णव ने कहा कि सरकार अंत्योदय में विश्वास करेंगे।













