आपके पास जो है उसका सम्मान करें: शुभांशु शुक्ला
युवा मामले एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में एक अनौपचारिक बातचीत में शुक्ला ने कहा, ‘‘हमें यह समझना और महसूस करना चाहिए कि हमारे पास क्या है। असल में हम इस बात पर ध्यान केंद्रित करते हैं कि हमारे पास क्या नहीं है। आपके पास जो है उसका सम्मान करें, उसका भरपूर उपयोग करें और सफलता बिना मांगे ही आपके पास लौटकर आएगी।’’
बचपन में कभी नहीं सोचा था कि मैं अंतरिक्ष यात्री बनूंगा: शुभांशु शुक्ला
इससे पहले, शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में अपने 18 दिनों के प्रवास के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि बचपन में वे हवाई शो देखकर बहुत रोमांचित हो जाते थे, लेकिन दोस्तों से प्रेरणा लेकर रक्षा पाठ्यक्रम के लिए आवेदन भरते समय वे संयोगवश लड़ाकू पायलट बन गए।
उन्होंने कहा, ‘‘बचपन में मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं अंतरिक्ष यात्री बनूंगा। मैं ‘अगर ऐसा होता तो क्या होता’ जैसी बातों में विश्वास नहीं करता। मेरा मानना है कि अभी आपके पास जो है, आप उसका क्या कर सकते हैं, उसी पर ध्यान देना चाहिए।’’
शुक्ला ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर समय बिताने से उन्हें जो अनुभव मिला उससे भारत को खुद का अंतरिक्ष स्टेशन विकसित करने में बहुत मदद मिलेगी।
अंतरिक्ष यात्री के चयन के बारे में उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन के दौरान जिन गुणों पर विचार किया जाता है, उनमें से एक है लचीलापन और उम्मीदवारों के असफलताओं से उबरने का तरीका।
एक- दो असफलताएं आपको परिभाषित नहीं कर सकती: शुभांशु शुक्ला
शुक्ला ने कहा, ‘‘असफलताओं से उबरना सीखें। मन में संदेह होना स्वाभाविक है। लेकिन एक-दो असफलताएं आपको परिभाषित नहीं करतीं। असफलता से उबरना, असफलता या सफलता से ऊपर उठकर अगला कदम बढ़ाना ही महत्वपूर्ण है। कभी संतुष्ट ना हों, हमेशा प्रगति की दिशा में बढ़ते रहें।’’
हम अपने देश के लिए जो भी लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं: शुभांशु शुक्ला
अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने कहा कि हम अपने देश के लिए जो भी लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं। चाहे वह अंतरिक्ष के क्षेत्र में हो, जैसे गगनयान मिशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन या चंद्रमा पर जाने की हमारी योजनाएं – इन चीजों को पूरा करने वाले ये बच्चे ही होंगे। इसलिए उन्हें यह समझना होगा कि यह उनकी जिम्मेदारी है, यह उनका काम है, और फिर मुझे लगता है कि हम एक बहुत बड़े स्तर पर बदलाव देखेंगे, और मुझे पूरा भरोसा है कि ऐसा होगा।
शुभांशु शुक्ला बोले- हमारा सपना 2047 तक विकसित भारत का
उन्होंने आगे कहा कि हमारा सपना 2047 तक एक विकसित भारत का है। मैं बहुत उत्साह और बहुत जागरूकता देख रहा हूं। मुझे लगता है कि अगर हम कड़ी मेहनत करें और हमारी नीयत सही हो तो तारीख तय करने की कोई जरूरत नहीं है। मुझे लगता है कि हम यह मील का पत्थर उससे (2047) पहले भी हासिल कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए हम सभी को यह विश्वास करना होगा कि हम यह कर सकते हैं।
हम समझ गए हैं कि अंतरिक्ष में प्रयोगों को कैसे संभव बनाया जाए
भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन और भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने कहा कि महत्वपूर्ण बात यह है कि हम समझ गए हैं कि अंतरिक्ष में प्रयोगों को कैसे संभव बनाया जाए। चूंकि हमारे पास स्वयं अंतरिक्ष में विज्ञान करने की क्षमता है, मुझे लगता है कि इससे देश के सभी शोधकर्ताओं के लिए अनुसंधान के द्वार खुल जाएंगे।
विंग कमांडर राकेश शर्मा पहली बार 1984 में अंतरिक्ष में गए थे। उसके बाद काफी लंबा अंतराल रहा। 41 वर्षों के बाद, हम फिर से अंतरिक्ष में पहुंचने में सक्षम हुए हैं। इस बार अंतराल उतना लंबा नहीं है क्योंकि हम अपने मानव अंतरिक्ष मिशन को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहे हैं और यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने लोगों को जल्द से जल्द वहां पहुंचाएं।













