सीतारमण ने एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि वायदा एवं विकल्प कारोबार (एफएंडओ) बाजार में आने वाले वाले 90 प्रतिशत से अधिक लोगों को भारी नुकसान हुआ है। सरकार ने इस तरह के वायदा एवं विकल्प कारोबार पर एसटीटी बढ़ाने का निर्णय लेते समय व्यापक जनहित को ध्यान में रखा है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में वायदा अनुबंधों पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। विकल्प प्रीमियम और विकल्प के प्रयोग पर एसटीटी को मौजूदा क्रमश: 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
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हस्तक्षेप की मांग
सीतारमण ने कहा कि वित्त मंत्रालय को सैकड़ों लोगों के फोन आते रहे हैं और वे सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते रहे हैं ताकि छोटे निवेशकों को तत्काल वायदा एवं विकल्प (एफ एंड ओ) खंड में नुकसान होने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा, ‘यह कदम (वायदा कारोबार में एसटीटी की बढ़ोतरी) राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से नहीं उठाया गया है।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार एसटीटी बढ़ाने के बजाय निवेशकों के लिए वायदा एवं विकल्प कारोबार में भाग लेने की सीमा तय कर सकती थी, सीतारमण ने कहा कि यह बढ़ोतरी एक पाबंदी और निवारक के रूप में काम करेगी।
मंत्री ने कहा, ‘सरकार जब भी कोई कदम उठाती है, तो वह आम जनता को ध्यान में रखकर उठाती है।’ वित्त वर्ष 2024-25 में शेयर वायदा एवं विकल्प खंड में कारोबार करने वाले व्यक्तिगत निवेशकों की संख्या 1.06 करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 (30 दिसंबर, 2025 तक) में घटकर लगभग 75.43 लाख रह गई। सेबी के एक अध्ययन के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में व्यक्तिगत निवेशकों को 1,05,603 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ।
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अमेरिका से आया शुभ संकेत
सेबी के अध्ययन के अनुसार, वायदा एवं विकल्प (एफ एंड ओ) खंड में खुदरा निवेशकों के 90% से अधिक कारोबार घाटे में जाते हैं और पूंजी बाजार नियामक ने अतीत में मात्रा कम करने के लिए कदम भी उठाए हैं। बाजार नियामक ने डेरिवेटिव बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय भी किए हैं। इनमें साप्ताहिक डेरिवेटिव को युक्तिसंगत बनाना, अनुबंध के आकार में वृद्धि, उच्च मार्जिन आवश्यकताएं आदि शामिल हैं।
सीतारमण ने यह भी कहा कि अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर शुल्क घटाकर 18% करने का निर्णय भारत के लिए एक ‘शुभ संकेत’ है और इससे निर्यात को गति मिलेगी। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बनी सहमति के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 25% जवाबी शुल्क को घटाकर 18% करने की घोषणा की है। अमेरिका ने अगस्त में भारतीय उत्पादों के आयात पर शुल्क को बढ़ाकर 25% करने के अलावा रूस से तेल खरीद जारी रखने पर 25% का अतिरिक्त शुल्क भी लगा दिया था। इस तरह भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में कुल 50% शुल्क लग रहा था।












