इन प्रस्तावों के तहत सेबी ने सुनवाई के अधिकार को नियमों में स्पष्ट रूप से शामिल करने, अयोग्यता से जुड़े मामलों के दायरे को परिभाषित करने और आवेदकों के लिए नियामकीय अनिश्चितता कम करने की सिफारिश की है। नियामक ने परिसमापन कार्यवाही शुरू होने मात्र को ही अयोग्यता मानने का संदर्भ हटाने का प्रस्ताव दिया है। इसके बजाय केवल अंतिम परिसमापन आदेश को ही ‘उपयुक्त और सक्षम व्यक्ति’ के आकलन के लिए मान्य माना जाएगा।
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सेबी की मौजूदा व्यवस्था
हालांकि, सेबी की मौजूदा प्रक्रिया में सुनवाई का अवसर दिया जाता है लेकिन इसे नियमों में स्पष्ट रूप से दर्ज करने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि किसी भी तरह की प्रक्रियात्मक अस्पष्टता न रहे। इसके लिए एक नया प्रावधान सुझाया गया है जिसमें किसी भी अयोग्यता से जुड़ी घटना की जानकारी सात दिन के भीतर सेबी को देना अनिवार्य होगा। साथ ही, बिना उचित सुनवाई के किसी व्यक्ति को ‘उपयुक्त और सक्षम’ नहीं ठहराया जा सकेगा।
सेबी के परामर्श पत्र के मुताबिक, कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद आवेदन पर विचार न किए जाने की अवधि को एक साल से घटाकर छह महीने करने का सुझाव भी दिया गया है।परिपत्र में समूह संस्थाओं और सहयोगी इकाइयों से जुड़े प्रावधानों में भी स्पष्टता लाने का प्रस्ताव है। सेबी ने इन प्रस्तावों पर 25 फरवरी तक सार्वजनिक रूप से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।













