पाकिस्तान-तालिबान में नाजुक संबंध
यह रिहाई 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से बॉर्डर पार की सबसे खराब लड़ाई के कुछ महीने बाद हुई है। अक्टूबर की झड़पों में दोनों देशों के दर्जनों लोग मारे गए थे, जिसके बाद दोनों पक्ष एक नाजुक सीजफायर पर सहमत हुए थे, लेकिन लंबे समय तक चलने वाली राजनीतिक समझ बनाने में नाकाम रहे। तालिबान और पाकिस्तान ने एक दूसरे पर संघर्ष विराम तोड़ने और हमले के आरोप लगाए हैं।
तालिबान ने पाकिस्तानी सैनिकों की रिहाई की पुष्टि की
तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने एक बयान में कहा कि 12 अक्टूबर को बॉर्डर पर लड़ाई के दौरान हिरासत में लिए गए सैनिकों को काबुल में एक सऊदी डेलीगेशन को सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि यह रिहाई तालिबान सरकार की “सभी देशों के साथ अच्छे रिश्ते” बनाए रखने की पॉलिसी के मुताबिक है और यह मुस्लिमों के पवित्र महीने रमजान से पहले हुई है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि यह “सऊदी अरब जैसे भाईचारे वाले देश” की रिक्वेस्ट के जवाब में भी था, जिसने हाल ही में दोनों पक्षों के बीच बातचीत होस्ट की थी।
पाकिस्तान ने तालिबान पर लगाए गंभीर आरोप
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मुख्य बॉर्डर क्रॉसिंग तनाव के कारण लंबे समय से बंद हैं। इससे 2,600 किमी (1,600 मील) की सीमा पर व्यापार और आने-जाने में रुकावट आ रही है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान का तालिबान शासन पाकिस्तान के अंदर हमले करने वाले आतंकवादियों को पनाह दे रहा है, जबकि काबुल इस आरोप से इनकार किया है।














