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  • ‘सऊदी अरब के पास परमाणु बम, अमेरिका और इजरायल भी जानते हैं’, ईरान के पूर्व कमांडर का सनसनीखेज दावा

    तेहरान: सऊदी अरब के पास न्यूक्लियर बम है और अमेरिका भी इस बात को जानता है। ईरान के इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड (IRGC) के पूर्व शीर्ष पदाधिकारी हुसैन कनानी मोघदम ने यह दावा किया है। अमेरिकी पत्रकार रिक सांचेज से बात करते हुए हुसैन कनानी मोघदम ने कहा कि हम जानते हैं कि सऊदी अरब के


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    By Azad Hind Desk फरवरी 10, 2026
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    तेहरान: सऊदी अरब के पास न्यूक्लियर बम है और अमेरिका भी इस बात को जानता है। ईरान के इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड (IRGC) के पूर्व शीर्ष पदाधिकारी हुसैन कनानी मोघदम ने यह दावा किया है। अमेरिकी पत्रकार रिक सांचेज से बात करते हुए हुसैन कनानी मोघदम ने कहा कि हम जानते हैं कि सऊदी अरब के पास न्यूक्लियर हथियार हैं। सऊदी ने दुनिया को यह दिखाया है कि उसके पास परमाणु बम नहीं है लेकिन ये सच्चाई नहीं है। ईरानी अफसर का यह दावा दुनिया में नई हलचल मचा सकता है।

    ग्रीन पार्टी के राजनेता और पूर्व IRGC कमांडर ने इंटरव्यू में दावा किया, ‘सिर्फ ईरान ही नहीं अमेरिका और इजरायल को भी सऊदी के पास परमाणु होने की जानकारी है। अमेरिका और इजरायल के साथ सऊदी की इस मुद्दे पर बातचीत होती रही है। सऊदी के परमाणु हथियारों को स्वीकार करने के बदले अमेरिका उससे इजरायल को मान्यता देने की शर्त रखता है।’

    अब्राहम अकॉर्ड में परमाणु हथियार पर चर्चा

    हुसैन कनानी मोघदम का कहना है कि इजरायल को मान्यता देने वाले अब्राहम अकॉर्ड में सऊदी के परमाणु हथियार भी चर्चा का बिंदु रहे हैं। अमेरिका का सऊदी अरब को अनौपचारिक रूप से न्यूक्लियर हथियारों की मंजूरी देने का प्रस्तावित समझौता इस बात पर निर्भर था कि वह अब्राहम समझौते पर साइन करे।

    हुसैन कनानी मोघदम ने ईरान की इंटेलिजेंस के हवाले से कहा कि अब्राहम अकॉर्ड बातचीत के दौरान यह तय हुआ था कि सऊदी अरब को न्यूक्लियर वेपन पर छूट मिलेगी। सऊदी के अकॉर्ड पर साइन करने के बदले इजरायल और अमेरिका इस छूट के लिए सहमत थे। हालांकि बाद में ये बातचीत ठंडे बस्ते में चली गई।

    सऊदी अरब की परमाणु बम की चाह

    सऊदी अरब क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सकारात्मक रुख के बावजूद रियाद ने अभी तक अब्राहम अकॉर्ड पर साइन नहीं किए हैं। खासतौर से 2023 के इजरायल के गाजा में किए गए हमले की वजह से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। उसके इजरायल के साथ औपचारिक डिप्लोमेटिक रिश्ते नहीं हैं।

    आधिकारिक तौर पर बात की जाए तो सऊदी अरब के पास ऑफिशिली न्यूक्लियर हथियार नहीं हैं। हालांकि सऊदी ने कई मौकों पर परमाणु बम की चाहत का इजहार किया गया है। सऊदी अरब ने परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान के साथ समझौता भी किया है, जिसमें एक देश पर हमले को दोनों देशों पर अटैक माना जाएगा।

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