पाकिस्तान में मीडिया रिपोर्टिंग पर कंट्रोल
इन अटकलों के बीच पाकिस्तानी सेना देश की मीडिया को बता रही है कि उसे क्या पब्लिश करना है और क्या नहीं। अमेरिकी स्थित ड्रॉप साइट न्यूज की जांच से पता चलता है कि पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग ISPR ने कथित तौर पर पिछले सप्ताह देश के मीडिया हाउसेज को संदेश भेजा था कि वे UAE, सऊदी अरब और यमन के बीच विवाद पर अपनी रिपोर्टिंग कम करें। पाकिस्तान के एक प्रमुख अग्रेजी दैनिक द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने इस मुद्दे पर अपनी कवरेज कम भी कर दी। एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने खाड़ी में तनाव पर रिपोर्टिंग की थी लेकिन अगले दिन लेखों को वेबसाइट से हटा दिया गया। सिर्फ डॉन ने ही रिपोर्टिंग की लेकिन वह ज्यादातर सरकार के बयानों पर ही केंद्रित रहा है।
सऊदी अरब और UAE में तनाव
खाड़ी के पड़ोसी देशों के बीच तनाव तब बढ़ गया जब सऊदी के नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हमला किया। सऊदी ने कहा कि उसने UAE से जुड़े हथियारों के शिपमेंट को निशाना बनाया जो यमन के अलगावादी सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के लिए था। STC को यूएई का समर्थन हासिल था। UAE ने हथियार भेजने के आरोपों को खारिज किया है।
मुकल्ला बंदरगाह पर हमले के बाद सऊदी समर्थित नेता रशाद अल-अलीमी ने UAE की सेनाओं को 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का आदेश दिया। सऊदी अरब ने इस मांग का समर्थन किया। इसके बाद UAE ने अपनी सेना निकालने की घोषणा कर दी और कहा कि वह तनाव कम करना चाहता है। इस बीच शुक्रवार को सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में STC के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, जिसमें कम से कम 20 अलगाववादी लड़ाके मारे गए हैं।
पाकिस्तान के लिए असमंजस
इस हमले के बाद सऊदी और यूएई में पहले से ही जारी तनाव और बढ़ गया है। यह स्थिति पाकिस्तान के लिए मुश्किल भरी है। सऊदी अरब पाकिस्तान के लिए विदेशी पैसे का सबसे बड़ा स्रोत है और जरूरी तेल आपूर्तिकर्ता भी है। सऊदी में 20 लाख से ज्यादा पाकिस्तानी रहते और काम करते हैं। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात में लाखों पाकिस्तानी काम के सिलसिले में रहते हैं। पाकिस्तान के अमीरों के लिए दुबई दूसरे घर जैसा है। ऐसे में सवाल है कि क्या असीम मुनीर युद्ध की स्थिति में सऊदी अरब के साथ UAE के खिलाफ सेना उतारेंगे?














