सऊदी अरब के खिलाफ ‘विद्रोह’ करने वाले सुन्नी देशों में मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, तुर्की, मोरक्को, मलेशिया और दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश इंडोनेशिया शामिल हैं। अब तक इनमें से कई देश सऊदी अरब के ऐलान को ही अंतिम मानते थे और उसका पालन करते थे। हालांकि इस बार ऐसा नहीं हुआ। मुस्लिम दुनियाभर में इस्लामिक कैलेंडर के आधार पर चांद को देखकर अलग-अलग दिनों पर रमजान की शुरुआत किए हैं। न्यू अरब की रिपोर्ट के मुताबिक सुन्नी देशों का सऊदी अरब के दिन को नहीं मानना यह दिखाता है कि धार्मिक रूप से उसका प्रभाव कम हो रहा हे।
सऊदी अरब के साथ कौन-कौन से सुन्नी देश?
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में अब कोई एक वैश्विक धार्मिक संस्था नहीं है जो रमजान के महीने के शुरुआत को निर्धारित कर सके। हर देश चांद को देखने के आधार पर अपने यहां रमजान के शुरुआत के दिन को निर्धारित करता है। वहीं सऊदी अरब के साथ जो सुन्नी देश रमजान की शुरुआत किए हैं, उनमें धुर विरोधी बन चुका यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और यमन शामिल हैं। चांद को देखने को लेकर दुनियाभर के मुस्लिम देशों में मतभेद है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि उनकी जमीन पर चांद दिखा या नहीं।
वहीं सऊदी अरब की बात करें तो वह एक मॉडल को फॉलो करता है। उसकी सुप्रीम जूडिशियल काउंसिल देशभर में चांद देखने वाली कमेटियों से बयान लेने के बाद रमजान के शुरुआत की घोषणा की जाती है। पहले खाड़ी के इस्लामिक देश अपने निर्णय परंपरा और धार्मिक वजहों से सऊदी अरब के आधार पर करते थे। अब फैसले राजनीतिक वजहों से भी लिए जा रहे हैं। जैसे सीरिया ने कहा है कि उसने अपनी जमीन पर निगरानी रखी लेकिन चांद नहीं दिखा। उसने सऊदी अरब का नाम नहीं लिया।
सऊदी अरब में हैं मक्का और मदीना
न्यू अरब ने बताया कि हाल के वर्षों में मिस्र और जॉर्डन की ओर से सऊदी अरब से अलग रुख रखा जा रहा है। सऊदी अरब में ही मक्का और मदीना हैं जिसकी वजह से उसके ऐलान को ऐतिहासिक रूप से धार्मिक लिहाज से पूरे सुन्नी जगत में काफी अहम माना जाता था। हालांकि अब सुन्नी देशों में अलग फैसले लेने का पैटर्न बनता दिख रहा है। ओमान भी कई साल से सऊदी अरब से अलग रुख अपना रहा है। सऊदी अरब की इसलिए भी आलोचना हुई कि कुछ पहले की घोषणाएं वैज्ञानिक लिहाज से सही नहीं पाई गई थीं।













