रक्षा मामलों से जुड़ी न्यूज वेबसाइट Militarnyi की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका सऊदी अरब पर तुर्की के KAAN फाइटर जेट और पाकिस्तान के जेएफ-17 फाइटर जेट की डील को लेकर भड़का हुआ है। इसके बाद सऊदी अरब को चीनी फाइटर जेट से अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं। वहीं सऊदी अरब ने अभी तक तुर्की के फाइटर जेट को लेकर कोई भी भरोसा अमेरिका को नहीं दिया है। अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब उसके एफ-35 फाइटर जेट को खरीदे लेकिन इजरायल इसका विरोध कर रहा है।
अमेरिका को पसंद नहीं आई चीनी फाइटर जेट की घुसपैठ
खाड़ी देश अब तक अमेरिकी हथियारों के बड़े ग्राहक रहे हैं और यहां पर चीनी फाइटर जेट की बैकडोर से एंट्री अमेरिका को रास नहीं आई और उसे चेतावनी देना पड़ा। इस बीच सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक और बड़े समझौते पर बात चल रही है। सऊदी अरब और पाकिस्तान रक्षा समझौता करने के बाद अब रणनीतिक आर्थिक समझौते की तैयारी कर रहे हैं। अरब न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब के पाकिस्तान में राजदूत नवाफ बिन सईद अल मलकी ने कहा कि यह आर्थिक समझौता दोनों मुस्लिम देशों के बीच रिश्ते को मजबूत करेगा।
पाकिस्तान और सऊदी में रक्षा समझौता
इससे पहले सऊदी अरब और पाकिस्तान ने सितंबर महीने में ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किया था। इस समझौते में कहा गया है कि एक देश पर हमला दूसरे देश पर हमला माना जाएगा। दोनों के बीच इस समझौते को लंबे समय से चले आ रहे सैन्य सहयोग को औपचारिक अमलीजामा पहनाने का ऐलान माना गया। सऊदी राजदूत ने कहा कि आर्थिक समझौते का बहुत ही जल्द ऐलान किया जाएगा। दोनों देश व्यापार को बढ़ाने पर भी काम करेंगे। सऊदी अरब और पाकिस्तान में बढ़ती दोस्ती के बीच यूएई पाकिस्तान से काफी नाराज लग रहा है। यूएई ने पाकिस्तान के लोन को चुकाने के लिए 2 साल की राहत देने से इंकार कर दिया है। यूएई और सऊदी अरब के बीच यमन से लेकर सूडान तक के मामले में तनाव चल रहा है।













