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  • सफलता को पाने से पहले स्वयं को इस योग्य बनाऐं कि अवसर आपके हाथ से न निकले

    तीर्थराज प्रयागराज में माघ मेले के दौरान एक सुविख्यात संत के पास दीक्षा लेने एवं जीवन में सफलता और सिद्धि हासिल करने के उद्देश्य को लेकर एक युवक पहुंचा। कई दिनों के इंतजार के बाद संत ने उसके हाथ में एक संदूक देकर कहा कि इसे उनके एक शिष्य को देकर आओ, संत ने निर्देश


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    By Azad Hind Desk जनवरी 4, 2026
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    तीर्थराज प्रयागराज में माघ मेले के दौरान एक सुविख्यात संत के पास दीक्षा लेने एवं जीवन में सफलता और सिद्धि हासिल करने के उद्देश्य को लेकर एक युवक पहुंचा। कई दिनों के इंतजार के बाद संत ने उसके हाथ में एक संदूक देकर कहा कि इसे उनके एक शिष्य को देकर आओ, संत ने निर्देश दिया कि संदूक को खोलना मत। संदूक लेकर कुछ दूर चलने के बाद युवक अपने कौतूहल को रोक नहीं सका, उसने आज्ञा का उल्लंघन कर संदूक को खोलकर देखा। संदूक खोलते ही उसमें से एक चूहा कूदकर भाग निकला। सफलता का नुख्सा प्राप्त करने एवं शिष्यत्व की आकांक्षा रखने वाले युवक ने चुपचाप संदूक बंद किया और वह उसे लेकर संत के बताए शिष्य के पास पहुंच गया, शिष्य भी एक अध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़ा हुआ साधक था। उसने संदूक देखते ही स्थिति समझ ली और कहा कि तुम स्वयं पर संयम नहीं रख सके।

    गुरु के आदेश का पालन नहीं किया, मना करने के बावजूद तुमने संदूक खोलकर देखा। जब असंयम के वशीभूत तुम एक चूहे को नहीं संभाल सके तो सफलता के सूत्र और धर्म के महान तत्व को कैसे संभाल सकोगे। उन्होंने उसे उपदेश किया कि पहले अपने अन्दर योग्यता एवं संयम की साधना करो, उसके बाद तुम्हें सफलता मिलेगी। जब व्यक्ति संयम की शक्ति जैसे दिव्य गुणों को संग्रहित कर लेता है तो उसके अन्दर एकाग्रता, योग्यता आदि का समावेश होता है, जिससे वह चाहें अध्यात्मिक क्षेत्र हो अथवा सांसारिक क्षेत्र, दोनों जगह सफलता हासिल करता है।

    तीर्थराज प्रयागराज में सदियों से माघ के पवित्र माह में विख्यात संत एवं महात्माओं का दर्शन एवं सत्संग प्राप्त होता है, जो व्यक्ति के जीवन की दिशा एवं दशा को बदलने की क्षमता रखता है। जब व्यक्ति के अन्दर संयम, एकाग्रता, कर्तव्यनिष्ठा आदि गुणों का समावेश होता है, तो सफलता अपने आप व्यक्ति के पास आ जाती है। सफलता को पाने से पहले स्वयं को इस योग्य बनाएं कि नियम और अनुशासन निभा सकें। सफलता व्यक्ति को नहीं, व्यक्ति की तैयारी को चुनती है, इसलिए ग्रह-नक्षत्रों, जन्मपत्री, हस्तरेखा के माध्यम से जानकरी प्राप्त कर अपनी योग्यता, पात्रता का भी विकास करना चाहिए ताकि ग्रह-नक्षत्रों के माध्यम से सफलता प्राप्त होने पर वह स्थायी रूप से आपकी योग्यता अनुसार आपके पास टिकी रहे।

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