चिंताजनक ट्रेंड । खतरे की घंटी यह है कि इस घटिया काम को करने के लिए किसी विशेष ज्ञान या हैकिंग की भी जरूरत नहीं पड़ी। लोगों ने सामान्य से चित्र डालकर ग्रोक से कहा कि इसके कपड़े हटा दो या कम कर दो। हैरान करने की बात है कि कई मामलों में Grok ने बिना कोई आपत्ति जताए ऐसा ही किया। हां, कुछ मामलों में उसने जरूर कहा कि उसे ऐसा करने की अनुमति नहीं है, लेकिन कुछ में ही। नतीजा, इंटरनेट पर AI से तैयार लोगों की नग्न और अर्धनग्न तस्वीरें वायरल होने लगी।
असली बनाम नकली। हमेशा की तरह इस हैवानियत के कई शिकार लड़कियां, महिलाएं और कम उम्र के बच्चे थे। इनकी तस्वीरों को करोड़ों लोगों ने देखा, वह भी बिना उनकी मंजूरी के और कई मामलों में बिना उनकी जानकारी के। और AI से तैयार इन चित्रों की क्वॉलिटी कई बार इतनी अच्छी की लोगों को यह असली लगे ! यह आर्टिकल लिखने तक परिस्थिति पर कुछ काबू पा लिया गया था। सरकार ने इसे लेकर X को कानूनी नोटिस भी भेजा। लेकिन, पूरे घटनाक्रम ने AI से जुड़े खतरों को एक बार फिर सबके सामने उजागर कर दिया है।
सुलभता भी परेशानी। यह कहना आसान है कि AI केवल एक माध्यम या यंत्र है और असली गलती उन लोगों की है, जो इसका दुरुपयोग करते हैं लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस को काफी बेलगाम तरीके से चलाया जा रहा है। लोकप्रिय बनाने के चक्कर में इसे बहुत सुलभ बना दिया गया है। Airtel और Reliance Jio अपने सब्सक्राइबर्स को मुफ्त में काफी शक्तिशाली AI टूल्स इस्तेमाल करने दे रही हैं। इसका नतीजा यह है कि आज 10-12 साल का बच्चा भी ChatGPT से दुनिया के नामी लोगों के आपत्तिजनक चित्र बनवा सकता है।
गलत जानकारी। हमारा सोशल मीडिया AI से बनाए चित्रों और फिल्मों से भरा पड़ा है, जिन्हें अब AI Slop कहा जा रहा है। कई बार तो हमें पता भी नहीं चलता कि ये AI द्वारा बनाए गए हैं। कई दल और गुट AI की मदद लेकर गलत जानकारी और अपनी विचारधारा को बढ़ने में महारथ हासिल कर चुके हैं।
कंपनियां करें उपाय। AI के दुरुपयोग रोकने के लिए कानून हैं, लेकिन जैसा कि Grok के मामले में हुआ, जब तक कानून, कोर्ट और पुलिस हरकत में आते हैं, काफी नुकसान हो चुका होता है। इसीलिए समय की मांग है कि AI टूल्स बनाने वाली कंपनियां, मसलन OpenAI, Google, Microsoft वगैरह सुरक्षा के ऐसे उपाय करें, जिससे इनका दुरुपयोग बहुत मुश्किल हो जाए।
जिम्मेदारी समझना जरूरी । Meta और X जैसी कंपनियों को ऐसे तरीके अपनाने होंगे, जिससे यूजर्स को पता रहे कि वह जो देख रहा है, उसे इंसान नहीं, AI ने बनाया है। Google और Bing जैसे सर्च इंजन को AI से लैस चित्रों और लेखों को चेतावनी के साथ दिखाना चाहिए। यह सब करना मुश्किल नहीं है, बस जरूरत है दृढ संकल्प और सामाजिक जिम्मेदारी दिखाने की। इसमें समय जरूर लगेगा, लेकिन इस इससे Grok जैसे जो किस्से सुनने को मिल रहे हैं, काफी कम हो जाएंगे।
ताकतवर पर खतरनाक । कहावत है कि बंदर के हाथ में उस्तरा देना आपदा को निमंत्रित करना है। हाल की घटनाओं को देख कर लगता है कि सभी लोगों को बेधड़क AI इस्तेमाल करने देना इससे भी ज्यादा खतरनाक है। इसमें दो राय नहीं कि AI में इंसानियत का भला करने की असीम क्षमता है, लेकिन यह तभी संभव है, जब इसका सदुपयोग हो। गलत हाथ इसका क्या करेंगे, यह Grok दिखा चुका है।
खिलौना नहीं AI । रामधारी सिंह दिनकर ने विज्ञान के खतरों को देख कर लिखा था, ‘सावधान, मनुष्य ! यदि विज्ञान है तलवार, तो इसे दे फेंक, तजकर मोह, स्मृति के पार। हो चुका है सिद्ध, है तू शिशु अभी नादान, फूल-कांटों की तुझे कुछ भी नहीं पहचान।’ ये पंक्तियां आज की स्थिति पर खरी उतरती हैं। AI के मामले में हममें से अधिकतर अज्ञानी बच्चों जैसे हैं, जो इसे खिलौने की तरह मनोरंजन के लिए इस्तेमाल कर रहे। लेकिन, AI की धार बहुत तेज है। गलत और अनुभवहीन हाथों में यह हमारा ही सर कलम कर सकता है।














