मार्च, 2025 के आंकड़ों के मुताबिक देश के 12 सरकारी बैंकों की कंबाइंड एसेट्स करीब 171 लाख करोड़ रुपये है। यह देश के बैंकिंग सेक्टर का करीब 55 फीसदी है। सरकार इन बैंकों में 51 फीसदी हिस्सेदारी अपने पास रखना चाहती है। हालांकि अभी सरकार के पास इन बैंकों में कहीं ज्यादा हिस्सेदारी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को फाइनेंशियल ईयर 2026-27 का बजट पेश करते हुए बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़ी घोषणा की थी।
दुनिया में बज रहा है चीन के बैंकों का डंका, टॉप 10 में भारत का एक भी नहीं
हाई-लेवल कमेटी
सीतारमण ने कहा था कि देश की बैंकिंग सेक्टर की व्यापक समीक्षा के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई जाएगी और सुधारों पर आधारित ग्रोथ के लिए नई योजना बनाई जाएगी। इसका मकसद भारतीय बैंकों को आने वाले समय के लिए विकसित भारत की योजना के मुताबिक तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय बैंक आज अच्छी स्थिति में हैं। उनका मुनाफा और दुनिया में पहुंच बढ़ी है। इस सेक्टर को अब और आगे ले जाने की जरूरत है। उसके लिए जरूरी उपाय किए जाएंगे।
एसेट्स के हिसाब से दुनिया के 10 बैंकों में भारत के दो बैंक शामिल हैं। इनमें एसबीआई और एचडीएफसी शामिल हैं। एसबीआई की टोटल एसेट्स 0.9 ट्रिलियन डॉलर है जबकि एचडीएफसी बैंक के पास 0.5 ट्रिलियन डॉलर के एसेट्स हैं। इस लिस्ट में टॉप 4 में चीन के बैंक शामिल हैं। आईसीबीसी 6.7 ट्रिलियन डॉलर के साथ पहले, एग्रीकल्चरल बैंक ऑफ चाइना ($5.9 ट्रिलियन) दूसरे, चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक ($5.6 ट्रिलियन) तीसरे और बैंक ऑफ चाइना ($4.8 ट्रिलियन) चौथे नंबर पर है।













