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  • साइबर ठग कैसे करते हैं काम सबको बताएं, केंद्र को सुप्रीम कोर्ट का आदेश

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को उन कमजोर लोगों को जागरूक कर मुआवजा देना चाहिए, जिन्होंने साइबर फ्रॉड में अपनी मेहनत की कमाई गंवा दी है। खासकर बुजुर्ग पीड़ितों की रक्षा करने की कोशिश भी करनी चाहिए। सोमवार को परमजीत खरब नाम के शख्स को जमानत देते हुए जस्टिस बी. वी. नागरत्ना


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    By Azad Hind Desk फरवरी 17, 2026
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    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को उन कमजोर लोगों को जागरूक कर मुआवजा देना चाहिए, जिन्होंने साइबर फ्रॉड में अपनी मेहनत की कमाई गंवा दी है। खासकर बुजुर्ग पीड़ितों की रक्षा करने की कोशिश भी करनी चाहिए। सोमवार को परमजीत खरब नाम के शख्स को जमानत देते हुए जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और उज्जल भुयान की बेंच ने यह टिप्पणी की। परमजीत पर ऑनलाइन-फ्रॉड पीड़ितों से वसूले गए पैसे को जमा करने के लिए बैंक अकाउंट बनाने और उन्हें कथित साइबर क्रिमिनल्स को बेचने का आरोप है।

    सबसे ज्यादा किन्हें करते हैं टार्गेट

    जस्टिस नागरत्ना ने अडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस. डी. संजय से कहा, ‘आपको लोगों को एजुकेट करना होगा। टीवी और रेडियो पर रेकॉर्डिंग चलाकर बताएं कि ये साइबर क्रिमिनल कैसे काम करते हैं। वे अधिकतर बुजुर्गों को टारगेट करते हैं और उन्हें उनके काम करने के तरीके के बारे में पता होना चाहिए। उन्होंने लाखों नहीं बल्कि करोड़ों की मेहनत की कमाई गंवाई है।’

    शर्तों के साथ जमानत

    बेंच ने खरब को यह देखते हुए जमानत दी कि दूसरे सह-आरोपियों को राहत दी गई है। उसे पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करने और हर महीने के पहले सोमवार को पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने कहा, ‘यह निर्देश दिया जाता है कि अपील करने वाला आगे के ट्रायल में पूरा सहयोग करेगा। ASG ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध जताया।

    ASG ने सुनाई आपबीती

    ASG ने कहा कि ये साइबर क्रिमिनल बहुत कॉन्फिडेंट और स्मार्ट होते है और वह खुद भी एक बार लगभग उनका शिकार हो ही गए थे। बेंच को बताया कि सरकार संचार साधी ऐप लेकर आई है। इस पर साइबर क्राइम, मोबाइल चोरी के बारे में रिपोर्ट कर सकते है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ‘लोगों को दिखाएं कि ये स्कैमस्टर कैसे काम करते है और ये फ्रॉड कैसे किए जाते है। आप लोगों को एजुकेट करें कि आपके पास ऐसी ही बातें आएंगी।

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