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  • सुधा चंद्रन ने माता की चौकी में 10 मिनट के अंदर पीया था 4.5 लीटर पानी, बताया- भगवान मुरगन ने दिया था दर्शन

    सुधा चंद्रन का जनवरी महीने के शुरुआती दिनों में एक वीडियो वायरल हुआ था, जो उनके घर पर हुई माता की चौकी का था। उसे देखकर कोई लोगों ने कई तरह की बातें कही थीं। उनकी आलोचना हुई थी। ओवरएक्टिंग भी कहा गया था। अब उन्होंने पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट ‘आबरा का डाबरा’ में उस


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    By Azad Hind Desk जनवरी 31, 2026
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    सुधा चंद्रन का जनवरी महीने के शुरुआती दिनों में एक वीडियो वायरल हुआ था, जो उनके घर पर हुई माता की चौकी का था। उसे देखकर कोई लोगों ने कई तरह की बातें कही थीं। उनकी आलोचना हुई थी। ओवरएक्टिंग भी कहा गया था। अब उन्होंने पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट ‘आबरा का डाबरा’ में उस दिन के बारे में खुलकर बात की। बताया कि 10 मिनट के अंदर उन्होंने 4.5 लीटर पानी पीया था। साथ ही पिता की मौत से पहले उन्होंने भगवान मुरगन को देखा था।

    सुधा चंद्रन ने पारस छाबड़ा ने पूछा, ‘अभी आपकी एक वीडियो बहुत वायरल हो रही है, माता की चौकी। आप पर माता आती हैं?’ एक्ट्रेस बोलीं, बहुत बड़ा शब्द है वो, मुझमें माता आती हैं, मुझे नहीं पता। लेकिन माता आकर मुझे ब्लेस जरूर करती हैं।’ फिर होस्ट ने सवाल किया, ‘मतलब कैसा होता है? मतलब होता क्या है? कैसे कनेक्ट हुए माता जी से?’ इस पर एक्ट्रेस ने विस्तार से बताया।

    माता रानी से सुधा चंद्रन का कनेक्शन

    सुधा बोलीं, ‘कनेक्शन… मेरी शादी एक पंजाबी से हुई है, तो शादी के बाद मेरे पिता इस बात में ज्यादा यकीन करते हैं कि हर साल कुल देवी-देवताओं की जाकर पूजा करने की जरूरत है। बहुत जरूरी है। आपकी आने वाली पीढ़ी के लिए कि हमसे कोई गलती ना हो। वो कहते हैं न पितृ दोष, वो नहीं होना चाहिए। तो मैंने रवि से पूछा कि हमारी कुल देवी तौन हैं तो उन्होंने कहा कि जहां तक याद है वैष्णो देवी। मेरे पापा ने पूछा कि आप लोग जाते हो या नहीं? तो रवि ने कहा कि मैं तो नही गया हूं लेकिन मेरे बड़े भाई साहब जाते थे।

    सुधा चंद्रन ने 10 मिनट में पीया 4.5 लीटर पानी

    आगे बताया, ‘मेरे पापा ने पूछा कि फिर रोका क्यों? दर साल आपको जाना चाहिए। पति ने कहा कि मुझे नहीं पता। पिता ने कहा कि इसी साल से तुम दोनों जाओगे। वहां से हमारा वैष्णो देवी का ट्रिप शुरू हुआ। 1995 में मेरी शादी हुई और 1997 में हमने शुरुआत की। तब से हर साल हम जाते हैं। और वहीं पर किसी ने चौकी की बात की थी तो मैंने रवि से पूछा कि क्या होता है। फिर जब मुंबई आए तो मैंने पति से चौकी की बात की और फिर तब से माता की चौकी कर रहे हैं। 22-23 साल हो गए। साल के पहले शनिवार को हम ये करते हैं। और इस बार ज्यादा हाई एनर्जी आई थी। रवि ने बाद में बताया कि 10 मिनट के अंदर मैंने 4.5 लीटर पानी पीया है। मैं पानी के लिए भीख मांग रही थी। उसके बाद डेढ़ दिन तक थकावट थी।’

    सुधा चंद्रन के नाम के पीछे की कहानी

    एक्ट्रेस ने डांसर बनने और अपने नाम के पीछे की कहानी बताई, ‘देखिए मेरी शुरुआत हुई थी मयूरी से। तेलुगू फिल्म थी। अगर हम आज बायोपिक्स की बात कर रहे हैं, तो पहली बायोपिक नाचे मयूरी थी। जितने भी बायोपिक्स बने हैं, उसमें किरदार कोई और निभा रहा है। ये पहली फिल्म ऐसी थी, कहानी मेरी थी और मैं खुद हिरोइन थी। मेरे पिता केरल से बहुत ही छोटी उम्र में परिवार की जिम्मेदारियों की वजह से वो वहां से मुंबई आ गए। टाइपिस्ट की नौकरी कर रहे थे एक बहुत बड़ी डांसर के घर पर। वो सोचते थे कि मेरी शादी हुई, मेरी बेटी होगी तो मैं उसे डांसर बनाऊंगा। और उसका नाम मैं सुधा रखूंगा। क्योंकि वह जिस जगह पर काम कर रहे थे, तो उन डांसर का नाम सुधा था।’

    सुधा चंद्रन और उनका एक्सीडेंट

    सुधा चंद्रन ने एक्सीडेंट के बारे में बताया, ‘मैंने अपनी दादी से कहा कि तुम दिन भर मुरगन मुरगन करती हो, मैं भी उस भगवान से मिलना चाहती हूं। हम गए। बस उसने स्टार्ट की होगी, 10 किलोमीटर के बाद एक एक्सीडेंट हो गया। दो बसों की टक्कर। चार-पांच दिन के बाद एक छोटा-सा फ्रैक्चर हो गया। इन्होंने क्या किया, मेरे दाहिने एड़ी के पास एक कट था, उन्होंने उस पर टांके लगा दिए, प्लास्टर ऑफ पेरिस डाल दिया, क्या अनर्थ कर दिया, मुझे नहीं पता। 15 दिन उन्होंने बहुत कोशिश की। लेकिन तब तक गैंगरीन सेटल हो गया था। मौत वाली जिंदगी हो गई थी। एम्पुटेशन (आधा पैर काटरकर अलग कर दिया गया) हो गया। तो बहुत बड़ा सवालिया निशान था एक डांसर के लिए कि बिना पैर के क्या करेगी वो। फिर तीन साल के बाद जब मैं स्टेज पर आई तो बहुत डर रही थी। क्योंकि 3.5 घंटे का परफॉर्मेंस था। आर्टिफीशियल लिम्ब के साथ। मैंने कहा कि किसी को इन्वाइट मत करने अप्पा। सिर्फ फैमिली मेंबर्स हों। अपने लिए मैं डांस करना चाहती हूं। जैसे कर्टन खुला, वहां 1000 लोग ऑडिटोरियम में थे।’

    सुधा चंद्रन को भगवान ने दिए थे दर्शन

    भगवान मुरगन के बारे में सुधा ने बताया, ‘मैंने एक कदम आगे बढ़ाया और मैंने कहा… मेरी दादी आगे बैठी थीं, हम मुरगन के पैर पड़े हैं और वो वाकई हमारे कुलदेव हैं किसी रूप में, आज वो मुझे यहां दर्शन देंगे। तब मैं मानूंगी। जैसे ही ये आइटम शुरू हुआ, वैसे ही एक ब्राह्मण आया ऑडिटोरियम के अंदर, एक ही सीट खाली थी अप्पा के पास आकर वो बंदा बैठा। बोला शो के बाद, प्रोग्राम के बाद, अपनी बेटी को ये कपूर जरूर दे देना। साथ में एक पर्स भी था। उन्होंने कपूर हाथ में दिया मुझे, मैंने पर्स खोलकर देखा तो उसमें मुरगन का फोटो था। मेरे पिता जब 3 दिन ICU में थे। और मेरे पिता हमेशा बोलते थे कि तुम टेंशन मत लेना सुधा, जब मैं जाऊंगा ना तो मुरगन आएगा मुझे लेने। मैं ऐसी बैठी हूं ICU में, अचानक से मुझे बाहर एक मोर दिखता है। जैसे ही मैंने उस मोर को देखा ना, मैंने कहा 10 मिनट में न्यूज आना है। और 5 मिनट के अंदर, डॉक्टर आए और बोले कि पिता अब नहीं रहे। 5 मिनट के अंदर पिता की मौत हो गई।’

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