यूजीसी नियमों में बदलाव को लेकर हो रहे विरोध के बाद बीते मंगलवार को सरकार की ओर से कहा गया था कि यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में आई है। केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी वर्ग, समुदाय या व्यक्ति के साथ अन्याय न हो। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के पास अभी सबसे बेहतर विकल्प यही है कि वह सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई का इंतजार करें और उसके आधार पर कोई फैसला लें।
नियमों पर होल्ड, कमेटी का विकल्प
विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियमों पर हो रहे विरोध के मद्देनजर सरकार के पास एक विकल्प यह भी है कि अभी नये नियमों को होल्ड पर रख दिया जाए, लेकिन इसकी संभावना कम ही है। कारण है कि सुप्रीम कोर्ट में इसपर मामले पर सुनवाई होनी है। वही सरकार अपनी ओर से कोई भी बदलाव करती है तो फिर नए सिरे से हंगामा शुरू हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक तीसरा विकल्प यह भी है कि नियमों के खिलाफ जो भी मुद्दे उठाए गए है। उनको एड्रेस करने के लिए एक कमेटी बना दी जाए, जो सभी हितधारकों से बात करें।
मायावती बचाव में बोलीं- विरोध ठीक नहीं
बीएसपी प्रमुख मायावती ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों का बचाव करते हुए कहा कि इस कदम का विरोध बिल्कुल भी उचित नहीं है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि सामाजिक तनाव से बचने के लिए नियमों को विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाना चाहिए था। मायावती ने ‘X’ पर पोस्ट कर कहा कि देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण के लिए समता समिति बनाने के नए नियम के कुछ प्रावधानों का केवल जातिवादी मानसिकता वाले सामान्य वर्ग के लोग ही विरोध कर रहे है। इसे भेदभाव और षड्यंत्र मानना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी का यह भी मानना है कि इस प्रकार के नियमो को लागू करने से पहले सभी को विश्वास में लिया जाना चाहिए था, जिससे सामाजिक तनाव पैदा नहीं होता। सरकारो और सभी सस्थानों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।













