सोलर फ्लेयर्स क्या हैं?
सोलर फ्लेयर्स सूरज के अंदर उठने वाले विस्फोटों के चलते उठते हैं। ये फ्लेयर्स चुंबकीय गुणों से भरे होते हैं और सौरमंडल में बढ़ते हैं। इन्हें सौर तूफान भी कहा जाता है। ये सौर तूफान जब पृथ्वी के वातावरण में टकराते हैं तो हलचल पैदा करते हैं। इस तरह के सोलर फ्लेयर्स से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की बहुत ज्यादा मात्रा निकलती है, जो लगभग तुरंत पृथ्वी तक पहुंच जाती है।
सोलर फ्लेयर्स से क्या है खतरा?
हालांकि, जमीन पर ये इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाते लेकिन आयनोस्फीयर को गंभीर रूप से डिस्टर्ब कर सकते हैं। इसके चलते हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो कम्युनिकेशन, नेविगेशन सिग्नल और सैटेलाइट ऑपरेशन में रुकावटें आ सकती हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) इस समय अपने 50 से ज्यादा ऑपरेशनल सैटेलाइट पर लगातार नजर बनाए हुए है।
4 फरवरी को सबसे तेज सोलर फ्लेयर्स
नासा के स्पेस अलर्ट ने पुष्टि की है कि तेज फ्लेयर्स 1 फरवरी को शुरू हुए थे। नासा ने अपने लेटेस्ट अलर्ट में कहा कि सूरज ने एक तेज फ्लेयर छोड़ा, जो 4 फरवरी को सुबह 7.13 बजे (अमेरिकी समयानुसार) अपने चरम पर था। लगातार सूरज को देखने वाली अमेरिकी एजेंसी की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने इस घटना की एक तस्वीर ली है। स्पेस एजेंसियों का कहना है कि यह घटना अक्टूबर 2024 के बाद से सबसे चमकदार सोलर फ्लेयर थी। इसके अलावा यह 1996 के बाद से रिकॉर्ड किए गए 20 सबसे पावरफुल सोलर फ्लेयर्स में से एक है।













