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  • सूर्य ग्रहण पर आज दिखेगा रिंग ऑफ फायर का नजारा, जल्द होगा चंद्र ग्रहण, जानें कब है ब्लड मून

    वॉशिंगटन: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी यानी आज मंगलवार को लगने जा रहा है। यह एक वलयाकार सूर्यग्रहण होगा जिसे दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा। इस ग्रहण की खास बात यह है कि यह पूर्णता के होने पर आसमान में आग के छल्ले जैसे नजर आता है। इसके चलते


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    By Azad Hind Desk फरवरी 17, 2026
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    वॉशिंगटन: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी यानी आज मंगलवार को लगने जा रहा है। यह एक वलयाकार सूर्यग्रहण होगा जिसे दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा। इस ग्रहण की खास बात यह है कि यह पूर्णता के होने पर आसमान में आग के छल्ले जैसे नजर आता है। इसके चलते यह रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है। वलयाकार ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है, लेकिन धरती से दूर होने के चलते वह आकार में छोटा नजर आता है और सूर्य को पूरा नहीं ढंक पाता है। इस ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा। हालांकि, इसके कुछ दिन बाद ही मार्च में एक खास चंद्रग्रहण इंतजार कर रहा है।

    भारत में नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण

    मंगलवार को लगने वाले सूर्य ग्रहण का रिंग ऑफ फायर फेज केवल अंटार्कटिका के बर्फीले इलाके में दिखाई देगा। हालांकि, आंशिक ग्रहण दक्षिण अफ्रीका और दक्षिणी अमेरिका के कुछ हिस्सों से जरूर दिखाई देगा। हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में भी इसे देखा जा सकता है। हालांकि, सूर्य ग्रहण के बाद खगोलवैज्ञानिकों की नजर कुछ ही दिनों में आने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण पर है, जो 3 मार्च को हो रहा है।

    चंद्र ग्रहण के लिए हो जाइए तैयार

    सूर्य ग्रहण के विपरीत 3 मार्च को होने वाला चंद्रग्रहण दुनिया के बड़े हिस्से में देखा जा सकेगा। खास बात यह है कि सूर्य ग्रहण को देखने के लिए जहां आंखों की सुरक्षा के लिए खास उपकरणों की जरूरत होती है, चंद्र ग्रहण को बिना किसी रुकावट के किसी भी जगह से सुरक्षित देखा जा सकता है।

    चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी अपने परिक्रमा पथ पर चलते हुए सूर्य और चांद के बीच आ जाती है। इस दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। पृथ्वी की छाया के दो हिस्से होते हैं। पहली होती है बाहरी छाया, जिसे पेनम्ब्रा कहते हैं। वहीं, अंदरूनी छाया को अंब्रा कहते हैं। पेनम्ब्रा की वजह से हल्की धुंधली रोशनी होती है लेकिन अंब्रा बहुत गहरी होती है। यह चांद के ऊपर जाती है तो चांद पूरा ढंक जाता है। हालांकि, इस गहरी छाया में चांद गायब नहीं होते, बल्कि लाल या नारंगी नजर में आने लगता है। यही वजह है कि इसे ब्लड मून भी कहा जाता है।

    भारत में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?

    चंद्र ग्रहण कई टाइम जोन में दिखेगा। उत्तरी और मध्य अमेरिका में यह सुबह तड़के होगा। पूर्वी एशिया और ऑस्ट्रेलिया के लोग इसे शाम में देखेंगे। सबसे खास बात है कि इसे भारत में देखा जा सकेगा। वहीं, प्रशांत महासागर के पार रहने वाले इसे रात में देख पाएंगे। अफ्रीका और यूरोप के लोगों के लिए अच्छी खबर नहीं है, क्योंकि इन इलाकों में चंद्र ग्रहण नहीं दिखाई देगा।

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