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  • सेबी लाया ‘लाइफ साइकल फंड’, नियमों में किया बदलाव, अब काम के आधार पर होंगे स्कीमों के नाम

    नई दिल्ली: बाजार नियामक सेबी ( SEBI ) ने गुरुवार को म्यूचुअल फंड स्कीमों की कैटेगरी तय करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब स्कीमों के नाम उनके काम के आधार पर होंगे, न कि लुभावने वादों पर। सेबी ने ‘लाइफ साइकल फंड्स’ के रूप में रिटायरमेंट प्लानिंग का नया विकल्प दिया है।


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    By Azad Hind Desk फरवरी 27, 2026
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    नई दिल्ली: बाजार नियामक सेबी ( SEBI ) ने गुरुवार को म्यूचुअल फंड स्कीमों की कैटेगरी तय करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब स्कीमों के नाम उनके काम के आधार पर होंगे, न कि लुभावने वादों पर। सेबी ने ‘लाइफ साइकल फंड्स’ के रूप में रिटायरमेंट प्लानिंग का नया विकल्प दिया है। सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीम को खत्म कर दिया है। निवेशकों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिस्क्लोजर और एक जैसे निवेश (ओवरलैप) नियमों को सख्त कर दिया है। Mutual Fund Investment: ₹10000 की SIP से बन गए 26 करोड़ रुपये, इस मिड कैप म्यूचुअल फंड ने दिया धांसू रिटर्न

    क्या हुआ नियमों में बदलाव?

    • सेबी ने अपने सर्कुलर में स्कीमों को मुख्य रूप से पांच कैटेगरी में बांटा है।
    • ये कैटिगरी इक्विटी (शेयर), डेट (कर्ज), हाइब्रिड, लाइफ साइकल और अन्य स्कीमें हैं।
    • इसमें ‘फंड ऑफ फंड’ और ‘पैसिव स्कीम’ जैसे इंडेक्स फंड या ईटीएफ (ETF) भी शामिल हैं।
    • सर्कुलर के मुताबिक सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीम्स की कैटेगरी को तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया गया है।
    • इस कैटेगरी की पुरानी स्कीमें अब नया निवेश नहीं ले सकेंगी। सेबी की मंजूरी के बाद इन्हें वैसी ही दूसरी स्कीमों में मर्ज कर दिया जाएगा।
    • सेबी ने कहा कि अब विदेशी सिक्योरिटीज (विदेशी निवेश) को एक अलग असेट क्लास नहीं माना जाएगा।

    क्या हैं लाइफ साइकल फंड्स?

    सेबी ने गुरुवार को म्यूचुअल फंड की एक नई कैटेगरी ‘लाइफ साइकल फंड्स’ की शुरुआत की है। ये ओपन एंडेड फंड होंगे। यानी इनमें कभी भी पैसा निकाला जा सकता है। लेकिन इनकी मैच्योरिटी पहले से तय होगी। ये फंड उन लोगों के लिए बेहतरीन हैं जो किसी खास लक्ष्य (रिटायरमेंट या बच्चों की पढ़ाई) के लिए निवेश करना चाहते हैं।

    इसमें ‘ग्लाइड पाथ’ रणनीति का इस्तेमाल होगा। इसके तहत पैसा अलग-अलग असेट क्लास जैसे इक्विटी (शेयर), डेट, InvITs, कमोडिटी (ETCDS) और गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में लगाया जाएगा। कंपनियां कम से कम 5 साल और ज्यादा से ज्यादा 30 साल के लिए लॉन्च कर सकती हैं।

    बदलाव की अहम बातें

    • स्कीम के नाम में मुनाफे का दावा करने वाले शब्दों पर रोक।
    • ‘सॉल्यूशन ओरिएंटेड’ स्कीमें बंद होगी, नए निवेश पर रोक।
    • ‘लाइफ साइकल फंड्स’ की शुरुआत, जो उम्र और लक्ष्य के हिसाब से निवेश बदलेंगे।
    • म्यूचुअल फंड को हर महीने बताना होगा कि स्कीमों के बीच निवेश में कितना ‘ओवरलैप’ है।
    • विदेशी निवेश को अब अलग असेट क्लास नहीं माना जाएगा।

    आंकड़ों पर एक नजर

    • 5 कैटेगरीः स्कीमों को इक्विटी, डेट, हाइब्रिड, लाइफ साइकल और अन्य में बांटा गया है।
    • 95% निवेशः इंडेक्स फंड, ईटीएफ और फंड ऑफ फंड्स (FoFs) के लिए कम से कम इतना निवेश अनिवार्य।
    • 5 से 30 सालः लाइफ साइकल फंड्स की मैच्योरिटी अवधि।
    • 6 महीनेः सभी मौजूदा स्कीमो को नए नियमों के पालन के लिए दिया गया समय।

    इंडेक्स और ETF में क्या बदला?

    इंडेक्स फंड और ईटीएफ के लिए यह जरूरी है कि उनकी कुल संपत्ति का कम से कम 95% हिस्सा उन्ही शेयरों या इंडेक्स में निवेश किया जाए जिसे वे ट्रैक कर रहे हैं। फंड ऑफ फंड्स (FoFs) को भी 95% संबंधित फंड्स में निवेश करना होगा। 5 साल से कम मैच्योरिटी वाले डेट निवेश के लिए, ‘AA’ या उससे बेहतर रेटिंग वाले साधनों में ही निवेश की अनुमति होगी।

    ओवरलैप पर सख्ती भी की गई है। म्यूचुअल फंड कंपनियों को हर महीने वेबसाइट पर बताना होगा कि अलग-अलग स्कीमों का निवेश (पोर्टफोलियो ओवरलैप) एक-दूसरे से कितना मेल खाता है। इसकी गणना हर सिक्योरिटी के वेटेज के आधार पर की जाएगी।

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