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  • सोनम वांगचुक की होगी रिहाई? हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट सोमवार को जेल में बंद सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। यह याचिका राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो की ओर से दायर की गई है। संभावना है कि जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ


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    By Azad Hind Desk फरवरी 1, 2026
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    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट सोमवार को जेल में बंद सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। यह याचिका राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो की ओर से दायर की गई है। संभावना है कि जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ मामले की सुनवाई करेगा।

    सोनम वांगचुक ने आरोपों का किया खंडन

    जोधपुर केंद्रीय कारागार में हिरासत में रखे गए वांगचुक ने 29 जनवरी को उन आरोपों का खंडन किया कि उन्होंने ‘अरब स्प्रिंग’ की तरह सरकार को उखाड़ फेंकने का बयान दिया था, और इस बात पर जोर दिया कि उन्हें आलोचना तथा विरोध करने का लोकतांत्रिक अधिकार है।

    गुमराह करने के लिए चुनिंदा फुटेज का किया इस्तेमाल

    वांगचुक की पत्नी की ओर से पेश हुए सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि पुलिस ने हिरासत में लेने वाले अधिकारियों को गुमराह करने के लिए चुनिंदा वीडियो फुटेज का इस्तेमाल किया है। जलवायु कार्यकर्ता के दूषित पानी के कारण पेट की समस्याओं की शिकायत करने के बाद सरकार ने एक विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा उनकी चिकित्सा जांच कराने का भी निर्देश दिया था।

    सोनम वांगचुक की पत्नी ने किया ये दावा

    आंगमो का दावा है कि हिरासत अवैध है और एक मनमाना कृत्य है, जो उनके (वांगचुक के) मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की ओर से 24 नवंबर को पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा आंगमो द्वारा दायर प्रत्युत्तर का जवाब देने के लिए समय मांगे जाने के बाद, शीर्ष अदालत ने मामले में सुनवाई स्थगित कर दी थी।

    क्या था मामला?

    अदालत ने 29 अक्टूबर को आंगमो की संशोधित याचिका पर केंद्र और लद्दाख प्रशासन से जवाब मांगा। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद, 26 सितंबर को वांगचुक को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया। इन प्रदर्शनों में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हो गए थे। सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था।

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