सोमनाथ में लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आज भी हमारे देश में वो ताकतें मौजूद हैं। पूरी तरह सक्रिय हैं, जिन्होंने सोमनाथ पुनर्निमाण का विरोध किया था। आज तलवारों की जगह दूसरे कुत्सिक तरीकों से भारत के खिलाफ षड़यंत्र हो रहे हैं। इसलिए हमें ज्यादा सावधान रहना है। हमें खुद को शक्तिशाली बनाना है। हमें एक रहना है। एकजुट रहना है। ऐसी हर ताकत को हराना है, जो हमें बांटने की साजिश रच रही है।
जामनगर के महाराज दिग्विजय सिंह का जिक्र
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि जब हम अपनी आस्था से जुड़े रहते हैं, अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। अपनी विरासत का संरक्षण करते हैं, उसके प्रति सजग रहते हैं तो हमारी सभ्यता की जड़ें भी मजबूत होती हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के यहां आने पर भी आपत्ति जताई गई। उस समय सौराष्ट्र के मशहूर हमारे जामनगर के महाराज दिग्विजय सिंह जी आगे आए।
नेहरू ने चिट्ठी लिखकर किया था फैसले का विरोध
दरअसल, साल 1951 और तारीख 11 मई को गुजरात में सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन हुआ। तब प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे और उन्होंने इस समारोह में शामिल होने से साफतौर पर इनकार कर दिया। इसके बाद देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद इस कार्यक्रम का हिस्सा बने। प्रधानमंत्री के पद पर बैठे पंडित जवाहर नेहरू ने तब डॉ. राजेंद्र प्रसाद के इस फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने बकायदा चिट्ठी लिखकर राष्ट्रपति के इस फैसले का विरोध किया था। तब कुछ लोगों ने भी नेहरू का खुलकर समर्थन किया था, जिसे नेहरू ने चुनाव में जमकर भुनाया।













