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  • स्टील की कीमत तय करने के लिए टॉप कंपनियों ने की थी साठगांठ? CCI जांच में हुआ खुलासा

    नई दिल्ली: प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, सरकारी कंपनी सेल (SAIL) और 25 अन्य कंपनियों पर स्टील की बिक्री की कीमतों पर मिलीभगत करके प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। इस खुलासे से इन कंपनियों और उनके शीर्ष अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगने का खतरा मंडरा रहा है। रॉयटर्स


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    By Azad Hind Desk जनवरी 6, 2026
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    नई दिल्ली: प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, सरकारी कंपनी सेल (SAIL) और 25 अन्य कंपनियों पर स्टील की बिक्री की कीमतों पर मिलीभगत करके प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। इस खुलासे से इन कंपनियों और उनके शीर्ष अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगने का खतरा मंडरा रहा है। रॉयटर्स ने एक गोपनीय दस्तावेज का हवाला करते हुए यह दावा किया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक CCI ने जेएसडब्ल्यू के अरबपति एमडी सज्जन जिंदल, टाटा स्टील के सीईओ टी.वी. नरेंद्रन और सेल के चार पूर्व प्रेजिडेंट्स सहित 56 शीर्ष अधिकारियों को भी 2015 से 2023 के बीच अलग-अलग समय पर कीमतों में हेरफेर करने का दोषी पाया है। यह जानकारी 6 अक्टूबर के एक CCI आदेश में है, जिसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है और पहली बार यह बात सामने आई है। जेएसडब्ल्यू स्टील ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया जबकि टाटा स्टील, सेल और संबंधित अधिकारियों ने रॉयटर्स की पूछताछ का कोई जवाब नहीं दिया। CCI ने भी इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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    कब शुरू हुई थी जांच

    यह जांच 2021 में शुरू हुई थी। कुछ बिल्डरों ने अदालत में आपराधिक मामला दायर कर आरोप लगाया था कि नौ कंपनियां मिलकर स्टील की आपूर्ति को सीमित कर रही थीं और कीमतें बढ़ा रही थीं। CCI ने इस जांच के तहत कुछ छोटी स्टील कंपनियों पर छापे मारे थे। CCI के अक्टूबर के आदेश के अनुसा जांच का दायरा बढ़ाकर 31 कंपनियों और उद्योग समूहों तक कर दिया गया था। साथ ही दर्जनों अधिकारियों को भी इसमें शामिल किया गया था। CCI के नियमों के तहत, कार्टेल जैसी गतिविधियों से जुड़े मामलों का विवरण तब तक सार्वजनिक नहीं किया जाता जब तक कि वे अंतिम रूप से तय न हो जाएं।

    आदेश में कहा गया है कि CCI की जांच में पक्षों के आचरण को भारतीय प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन में पाया गया है और कुछ व्यक्तियों को भी उत्तरदायी ठहराया गया है। यह निष्कर्ष किसी भी प्रतिस्पर्धा कानून मामले का एक महत्वपूर्ण चरण होता है। इन निष्कर्षों की समीक्षा CCI के शीर्ष अधिकारी करेंगे। कंपनियों और अधिकारियों को भी अपनी आपत्तियां या टिप्पणियां प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। जांच के बड़े पैमाने को देखते हुए, इस प्रक्रिया में कई महीने लगने की संभावना है। इसके बाद CCI अपना अंतिम आदेश जारी करेगा, जो सार्वजनिक रूप से जारी किया जाएगा।

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    स्टील की मांग

    भारत दुनिया में कच्चे स्टील का दूसरा बड़ा उत्पादक है। देश में बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ने के कारण स्टील की मांग लगातार बढ़ रही है। कमोडिटी कंसल्टेंसी बिगमिंट के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बाजार में जेएसडब्ल्यू स्टील की हिस्सेदारी 17.5% है, टाटा स्टील की 13.3% और सेल की 10% है। मार्च 2025 में समाप्त हुए पिछले वित्त वर्ष में जेएसडब्ल्यू स्टील ने 14.2 बिलियन डॉलर का स्टैंडअलोन राजस्व दर्ज किया, जबकि टाटा स्टील का राजस्व 14.7 बिलियन डॉलर था।

    CCI के पास स्टील कंपनियों पर गलत काम के प्रत्येक वर्ष के लिए उनके लाभ के तीन गुना या टर्नओवर का 10%, जो भी अधिक हो, तक का जुर्माना लगाने का अधिकार है। व्यक्तिगत अधिकारियों पर भी जुर्माना लगाया जा सकता है। मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने बताया कि जेएसडब्ल्यू और सेल ने CCI के समक्ष आरोपों से इनकार किया है।

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