रूसी स्पेसक्रॉफ्ट की अंतरिक्ष में गतिविधियां हाल ही में हुए म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान चिंता की बात रही है। 2023 में लॉन्च होने के बाद से Luch-2 यूरोप के 17 सैटेलाइट के पास पहुंच चुका है, ये सभी NATO देशों के हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि भले ही डेटा एनक्रिप्टेड हो, फिर भी रूसी लोग काम की जानकारी इकठ्ठा कर सकते हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि रूस कुछ सालों से सैटेलाइट युद्ध की तैयारी कर रहा है। म्यूनिक सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में सैटेलाइट वॉरफेयर को अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया है।
स्पेस में रूस कर सकता है परमाणु हमला
रूसी स्पेसक्रॉफ्ट के बारे में अमेरिकी और ब्रिटिश सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि ये असल में अटैक सैटेलाइट हैं, जो नेस्टिंग डॉल की तरह काम करते हैं। यह एक छोटा सब-सैटेलाइट छोड़ता है, जो बदले में एंटी-सैटेलाइट हथियार छोड़ता है। माना जाता है कि यह छोटा क्राफ्ट एक काइनेटिक किल व्हीकल है, जिसे सैटेलाइट को बेकार करने या खत्म करने के लिए डिजाइन किया गया है।
लेकिन इन सबके बीच स्पेस वॉर का एक खतरना डेवलपमेंट यह है कि रूस अंतरिक्ष में परमाणु हथियार लॉन्च कर सकता है। साल 2024 में पहली बार अमेरिका को रूस के एंटी सैटेलाइट मिसाइल बनाने के बारे में जानकारी मिली थी, जिस पर परमाणु हथियार लगा था। इसे लो ऑर्बिट में हमला करने के लिए डिजाइन किया गया था। ये धमाके हजारों पश्चिमी सैटेलाइट को नष्ट कर सकते हैं और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में सभी को मार सकते हैं।
रूस का कैसे होगा मुकाबला?
अमेरिका इस बात की तैयारी कर रहा है कि रूस के इस हथियार का वह किस तरह से जवाब दे सकता है। इसका एक तरीका रिप्लेसमेंट सैटेलाइट को जल्द से जल्द लॉन्च करना है, जो स्थिति पर नजर रख सके। साल 2023 में अमेरिका की स्पेस फोर्स ने एक सप्ताह में सैटेलाइट को वेयरहाउस से सैटेलाइट को ऑर्बिट में तैनात किया था। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि अगर न्यूक्लियर स्पेस अटैक हुआ तो कई सैटेलाइट की जरूरत होगी।
कितना बड़ा है स्पेस वॉर का खतरा?
पिछले सितम्बर में जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने अंतरिक्ष में खतरे को लेकर आगाह किया था। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट नेटवर्क हमारी आज की जिंदगी की नींव बन गया है। उन पर हमला करके पूरे देश को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा, भविष्य की लड़ाइयां ऑर्बिट में लड़ी जाएंगी। उन्होंने आगे कहा कि रूस और चीन स्पेस वॉरफेयर में आगे बढ़ चुके हैं। स्पेस में कोई बॉर्डर या महाद्वीप नहीं होते। यह एक ऐसा खतरा है जिसे हम अब और नजरअंदाज नहीं कर सकते। कुछ समय पहले ही यूरोपीय संघ और नाटो ने अंतरिक्ष में रूस और चीन के हमलों का मुकाबला करने के लिए स्पेस शील्ड पर काम करने को लेकर सहमति जताई थी।













