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  • स्लीपर बसों को बनाने में लापरवाही पर होगा सख्त ऐक्शन, नितिन गडकरी ने कहा- सीबीआई जांच करवाएंगे

    नई दिल्ली : देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और स्लीपर बसों को बनाने में बरती जा रही अनियमित्तओं को रोकने के लिए केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सख्त एक्शन लेने पर काम कर रहे हैं। इसके तहत केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा है कि कुछ मामलों की जांच के लिए सीबीआई को


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    By Azad Hind Desk जनवरी 8, 2026
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    नई दिल्ली : देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और स्लीपर बसों को बनाने में बरती जा रही अनियमित्तओं को रोकने के लिए केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सख्त एक्शन लेने पर काम कर रहे हैं। इसके तहत केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा है कि कुछ मामलों की जांच के लिए सीबीआई को लिखने वाले हैं। उन्होंने कहा कि प्राइवेट बस बॉडी बिल्डरों (वेंडरों) द्वारा बसों को बनाने में बरती गई बड़े स्तर पर लापरवाही, सुरक्षा मानकों पर खरी ना उतरने के बावजूद फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने और अन्य तरह के घपलों के संदेह होते देख कुछ मामलों की जांच सीबीआई से भी कराने के लिए रिकमंड किया जाएगा।

    जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

    उन्होंने कहा कि हमारे काफी प्रयास करने के बावजूद सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने की जगह बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने पिछले साल तीन महीनों में राजस्थान समेत अन्य राज्यों में स्लीपर बसों में आग लगने की हुई पांच से छह घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें 145 लोग जिंदा जल गए। हम किसी भी तरह की माफी या अनदेखी करने के मूड में नहीं हैं। किसी भी कीमत पर इन पर अंकुश लगाना ही है।

    इसके लिए मंत्रालय की तरफ से राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर पूछा गया है कि वह बताएं कि इन दुर्घटनाओं के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है? इनमें किस-किस स्तर पर लापरवाहियां बरती गईं? हम गलती करने वाले अधिकारियों को बख्शेंगे नहीं। इसके अलावा भी अब ऐसे जो भी मामले सामने आएंगे। उनमें जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लिया जाएगा।

    टक्कर रोकने के लिए वी2वी

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि गाड़ियों की आपस में टक्कर होने से रोकने के लिए वी2वी (वीकल-टू-वीकल) सिक्योरिटी फीचर पर काम किया जा रहा है। इस तकनीक में कारों के आपस में वायरलेस तरीके से बात करने और स्पीड, अचानक ब्रेक लगाने, खड़ी गाड़ी और गाड़ी की लोकेशन देने जैसी रियल-टाइम जानकारी शेयर करती है। जिससे टक्करों से बचा जा सकता है। यह फीचर अमेरिका, यूरोप, जापान और चीन जैसे देशों में नई कारों में इसे लगाने के लिए अनिवार्य करने या ट्रायल कर रही हैं।

    केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने बताया कि इस सिस्टम के तहत टेलीकॉम मंत्रालय फ्री में स्पेक्ट्रम देगा। इस साल के अंत तक इसके लिए नोटिफिकेशन कर दिया जाएगा। इस सिस्टम को ना केवल कारों बल्कि चार पहियों से उपर के सभी वाहनों जैसे बसों और ट्रकों में भी लगाया जाएगा। इसमें वाहन बनाने वाली कंपनियों से कहा जाएगा कि वह कार और अन्य गाड़ियां बनाते वक्त गाड़ियों में चार से छह हजार रुपए के इस सिस्टम वाले एक ओबीयू को लगाएं।

    ताकि सड़क पर चलते हुए गाड़ियां आपस में बात करते हुए संभावित टक्कर को रोक सकें। यह सिस्टम धुंध के मौसम में सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों से टकराव को बचाने में अहम रोल अदा करेगा। यह कारों में लगाए जा रहे ADAS और अन्य सिक्योरिटी फीचर से अलग एडवांस सिस्टम होगा।

    प्राइवेट बस वेंडर नहीं बना सकेंगे स्लीपर बसें

    गडकरी ने घोषणा की कि देश में प्राइवेट बस वेंडर स्लीपर बसें नहीं बना सकेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले साल राजस्थान और अन्य राज्यों में जो स्लीपर बसों में आग लगने से 145 लोगों की जलने से दर्दनाक मौतें हुईं। उनमें बड़े स्तर पर लापरवाहियां सामने आईं। बस बनाने वाले प्राइवेट बस बॉडी बिल्डरों ने उन्हें बनाने में सुरक्षा मानक ताक पर रखी। इन सब बातों को देखते हुए नियमों को रिवाइज करते हुए प्राइवेट बस वेंडरों से स्लीपर बस बनाने के राइट खत्म कर दिए गए हैं।

    इन बसों को चेसिस बनाने वाली कंपनियां ही बनाएंगी। इस खबर को सबसे पहले आज़ाद हिन्द ने पिछले साल 17 दिसंबर को लिखा था। इस मामले में गुरुवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्राइवेट बस बनाने वाले वेंडर इनमें कई स्तर पर लापरवाहियां बरत रहे थे। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। नई बनने वाली स्लीपर बसों के लिए भी नियमों को रिवाइज कर उनमें कई अन्य सेफ्टी फीचर जोड़े गए हैं।

    दुर्घटनाओं को 2030 तक 50% कम करने का लक्ष्य
    देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी मंत्रालय ने एक संस्था के साथ मिलकर एक प्लान तैयार किया है। जिसमें देश में 2030 तक 50 फीसदी रोड एक्सीडेंट कम करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट के रूप में एक योजना पर काम भी किया जा रहा है।

    इसमें देश के 100 जिलों में राज्य पुलिस-प्रशासन, ट्रांसपोर्ट विभाग और अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर सड़क दुर्घटनाओं को 50 फीसदी तक कम करने पर काम किया जा रहा है। इसमें जरूरत के मुताबिक अधिक एक्सीडेंट होने वाली ब्लैक स्पॉट पर पुलिसकर्मियों को तैनात करने और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी ओवर स्पीडिंग, सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों और अन्य कमियों पर अंकुश लगाते हुए एक्सीडेंट कम किए जाएंगे।

    पैसे लेकर छोड़ने वाले पुलिस, ट्रांसपोर्ट विभाग के कर्मचारियों का क्या?

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से आज़ाद हिन्द ने सवाल किया कि देश में 2030 तक रोड एक्सीडेंट 50 फीसदी कम करने का लक्ष्य और अन्य नियम बनाना तो ठीक है। लेकिन सड़कों पर नियम तोड़ने वाले जिन गाड़ी वालों को राज्यों की पुलिस और ट्रांसपोर्ट विभाग के कर्मचारी रिश्वत लेकर छोड़ देते हैं, उन पर कैसे अंकुश लगाएंगे?

    इस सवाल के जवाब में गडकरी और सचिव उमाशंकर ने कहा कि सही में यह भी एक बड़ी गंभीर समस्या है। इस पर भी हम बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं ताकि एनफोर्समेंट सख्त हो सके। इसके लिए योजना बनाई जा रही है कि ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ मेनवल से कहीं अधिक तकनीक का सहारा लेते हुए चालान काटने जैसे काम किए जाएं। ताकि बीच में मानवीय हस्तक्षेप खत्म या कम से कम हो सके। फिर इस तरह की समस्या भी खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा अन्य योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

    रोड एक्सीडेंट में घायल लोगों के लिए कैशलेस योजना की शुरुआत

    केंद्रीय ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही देशभर में सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों के लिए कैशलेस स्कीम की शुरूआत करेंगे। 14 मार्च 2024 को चंडीगढ़ में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करने के बाद इसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, असम और पुडुचेरी में भी शुरू किया गया। अब इस योजना को देशभर में इसके नाम के साथ लांच किया जाएगा।

    राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ट्रांसपोर्ट मंत्रियों और कमिश्नरों की वार्षिक बैठक की अध्यक्षता करने के बाद उन्होंने कहा कि इस योजना में रोड एक्सीडेंट में घायल होने वाले पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने वाले को राहवीर कहा जाएगा। उसे 25 हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा। घायल को सरकारी या प्राइवेट किसी भी अस्पताल में ले जाया जा सकेगा। कोई इसे मना नहीं कर सकेगा। सात दिन के इलाज के लिए डेढ़ लाख रुपए सरकार की तरफ से दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई गई है। जो की एमवी एक्ट की स्टडी कर अपने सुझाव देगी।

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