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  • स्वदेशी के साथ ‘स्वामित्व’ वाली आत्मनिर्भरता, रक्षा खरीद की बदलेगी परिभाषा,अगले दशक में ‘जय’ की तैयारी

    नई दिल्ली: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही मोदी सरकार के विकसित भारत का मूल आधार है। लेकिन, अब यह सरकार इस आत्मनिर्भरता की परिभाषा को भी बदलकर और भी स्वदेशी करने की तैयारी में है। इस योजना के तहत रक्षा मंत्रालय का रक्षा खरीद में अब मात्र मेड इन इंडिया से फोकस शिफ्ट होकर हथियारों,


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    By Azad Hind Desk फरवरी 11, 2026
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    नई दिल्ली: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही मोदी सरकार के विकसित भारत का मूल आधार है। लेकिन, अब यह सरकार इस आत्मनिर्भरता की परिभाषा को भी बदलकर और भी स्वदेशी करने की तैयारी में है। इस योजना के तहत रक्षा मंत्रालय का रक्षा खरीद में अब मात्र मेड इन इंडिया से फोकस शिफ्ट होकर हथियारों, टैंकों, फाइटर जेट,ड्रोन और मिसाइलों के पूर्ण स्वदेशी स्वामित्व पर हो रहा है।

    ड्राफ्ट डीएपी 2026 में बड़ा बदलाव क्या है

    मंगलवार को रक्षा मंत्रालय ने ड्राफ्ट डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर (DAP) 2026 जारी करके सभी स्टेकहोल्डरों से 3 मार्च, 2026 तक राय मांगी है। इस ड्राफ्ट पॉलिसी में स्पष्ट किया गया है ‘अगले दशक में सफलता का पैमाना मात्र मेड इन इंडिया ही नहीं होगा, बल्कि भारत के स्वामित्व वाला होगा।’ मतलब, भारत में जो भी डिफेंस वेपन या सिस्टम बनेंगे, उसपर देश का संप्रभु नियंत्रण भी होगा।

    रक्षा खरीद की ड्राफ्ट नीति में नया क्या है

    रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद की इस ड्राफ्ट पॉलिसी से साफ हो गया है कि अगर देश में विदेशी सहयोग से कोई रक्षा उत्पाद तैयार भी होते हैं, तो उसकी इंटेलेक्चुअलर प्रॉपर्टी, सोर्स कोड, महत्वपूर्ण डिजाइन डेटा और उस प्लेटफॉर्म को स्वतंत्र रूप से अपग्रेड करने के अधिकार पूर्ण रूप से देश के पास सुरक्षित रहेंगे। मतलब, अब भारत सिर्फ विदेशी मूल के हथियारों और अन्य रक्षा उपकरणों के मात्र भारत में उत्पादन करने की सोच से आगे निकल रहा है।

    स्वदेशी स्वामित्व वाले हथियारों का मतलब क्या

    रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद ड्राफ्ट नीति से यह बात साफ हो रही है कि अब चाहे अन्य देशों के ऑरिजिन वाले टैंक खरीदे जाएं या युद्धपोत या फिर फाइटर जेट से लेकर मॉडर्न ड्रोन सब पूर्ण रूप से भारत के स्वामित्व वाले होंगे और हम जब चाहें उसमें बदलाव कर सकते हैं या उसे अपनी जरूरत के हिसाब से अपग्रेड कर सकते हैं।

    रक्षा खरीद में स्वदेशीकरण की नई सोच क्या है

    ड्राफ्ट डीएपी 2026 में इसे ‘स्वदेशीकरण के शुरुआती चरण’ से ‘सैद्धांतिक प्रस्थान’ बताया गया है। मतलब अब हम मात्र भारत में निर्माण और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी वाली सोच से बाहर निकल रहे हैं, जिससे संबंधित सिस्टम के विरासत को ढोते रहने के बंधन से भारत को मुक्ति मिल सकती है। नई नीति का लक्ष्य भारत को दुनिया को डिजाइन का पावरहाउस बनाने का है।

    रक्षा इतिहास में भारत का अगला दशक कैसा होगा

    ड्राफ्ट डीएपी 2026 में ‘अगले दशक को स्वतंत्रत भारत के रक्षा इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक दशक बताया गया है।’इसके अनुसार भारत सरकार रक्षा क्षेत्र में देश की मजबूती के लिए तीन तरह से तैयारी रखना चाहती है, जिसे JAI (जय) का नाम दिया गया है। JAI मतलब- Jointness (संयुक्तता), Atmanirbharta (आत्मनिर्भरता) और Innovation (नई खोज)। अभी रक्षा खरीद के मामले में डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 पर अमल किया जा रहा है, जैसे ही ड्राफ्ट डीएपी 2026 को मंजूरी मिलेगी, रक्षा खरीद की पूरी नीति ही बदल जाएगी।

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