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  • स्वदेशी फाइटर जेट इंजन, छठी पीढ़ी के लिए अब सिर्फ 5 साल, क्या है नेशनल एयरो इंजन मिशन

    नई दिल्ली: भारत ने फाइटर जेट इंजन बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार स्वदेशी फाइटर जेट इंजन बनाने के कठिन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने एक तरह से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को


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    By Azad Hind Desk फरवरी 17, 2026
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    नई दिल्ली: भारत ने फाइटर जेट इंजन बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार स्वदेशी फाइटर जेट इंजन बनाने के कठिन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने एक तरह से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को आने वाले पांच से सात साल में फाइटर जेट के स्वदेशी इंजन विकसित करने का लक्ष्य दे दिया है। सरकार का तर्क है कि स्वदेशी जेट इंजन विकसित करने में हम पहले ही लगभग दो दशक गुजार चुके हैं, इसलिए यह लक्ष्य उचित है। इस टारगेट को प्राप्त करने के लिए नेशनल एयरो इंजन मिशन की पहल की गई है।

    स्वदेशी फाइटर जेट इंजन प्रोजेक्ट में तेजी पर जोर

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को बेंगलुरु स्थित डीआरडीओ के गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैबलिश्मेंट (GTRE) गए और वहां स्वदेशी जेट इंजन प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों से कहा कि देश की सामरिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इन स्वदेशी जेट इंजनों को तैयार करने की समय-सीमा को छोटा करें। उन्होंने कहा कि स्वदेशी एयरो इंजन बनाने में पहले ही बहुत समय और प्रयास लग चुके हैं और अब समय आ गया है कि इन कोशिशों को अंजाम तक पहुंचाया जाए।

    छठी पीढ़ी के जेट इंजन के विकास की पहल शुरू

    भारतीय वैज्ञानिक अभी पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट एडवांस मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के प्रोटोटाइप पर काम कर रहे हैं। भारतीय वायु सेना तक इसके पहुंचने में कम से कम एक दशक तक लगने की संभावना है। लेकिन, केंद्र सरकार ने उससे आगे की ओर देखना शुरू कर दिया है। राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों से कहा है, ‘हमें जल्दी से जल्दी छठी पीढ़ी (फाइटर जेट इंजन) की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का विकास शुरू कर देना चाहिए।’

    सरकार ने वैज्ञानिकों को दिया 5-7 साल का लक्ष्य

    रक्षा मंत्री ने माना कि एयरो इंजन बनाना बहुत ही जटिल प्रक्रिया है और इसमें थर्मोडिनामिक्स, मैटेरियल साइंस, फ्लूड मेकेनिक्स और एडवांस मेकेनिकल इंजीनियरिंग सबमें तालमेल बिठाकर काम करना होता है। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित देशों को भी अगली पीढ़ी का इंजन बनाने में 25 से 30 साल लग जाते हैं। लेकिन, देश की सामरिक आवश्यकताओं पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘हम मान लें कि 20 साल पहले ही गुजर चुके हैं और अब हमारे पास मात्र 5 से 7 साल बचे हैं।’

    एडवांस फाइटर जेट के लिए बन रहा कावेरी इंजन

    दरअसल, स्वदेशी कावेरी इंजन प्रोजेक्ट में पहले ही दशरों की देरी हो चुकी है। जीटीआरई में रक्षा मंत्री ने कावेरी इंजन का आफ्टरबर्नर इंजन टेस्ट भी देखा, जिसे एडवांस फाइटर जेट के लिए ही बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम तेजी से एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की डिजाइन और डेवलपमेंट की ओर बढ़ रहे हैं। हम अतीत में एयरो इंजन के फील्ड में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए कई प्रयास कर चुके हैं। अब इसे पूरा करने का समय आ चुका है। हम खुद को 5वीं पीढ़ी तक सीमित नहीं कर सकते। हमें निश्चित रूप से 6ठी पीढ़ी पर काम शुरू करना होगा। इस पर रिसर्च समय की मांग है।’

    क्या है नेशनल एयरो इंजन मिशन

    इस मौके पर राजनाथ सिंह ने एयरो इंजन डेवलपमेंट के लिए यूनाइटेड किंगडम के साथ ज्वाइंट स्टडी के लिए जीटीआरई की सराहना की। उन्होंने कहा कि नेशनल एयरो इंजन मिशन के तहत फ्रांस के साथ भी एयरो इंजन के विकास के लिए काम शुरू कर दिया गया है। उनके अनुसार, ‘फ्रांस और यूके दोनों ही एयरो इंजन टेक्नोलॉजी में बहुत ही एडवांस हैं। ये सहयोग हमें न केवल नई टेक्नोलॉजी सीखने का मौका देंगे, बल्कि पिछले कुछ दशकों में उनके सामने जो चुनौतियां आई हैं, उनको समझने में भी मदद मिलेगी।’ दरअसल भारत, फ्रांस के साथ मिलकर 120 किलोन्यूटन इंजन बना रहे हैं, जो एएमसीए प्रोग्राम में इस्तेमाल होगा।

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