लोइटरिंग म्यूनिशन बनाने वाली कंपनियां
भारत में निजी क्षेत्र की कंपनियों में टाटा एडवांस्ड सिस्टम, अडानी डिफेंस, सोलार डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड, न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज के अलावा नीबे डिफेंस और ए विजन जैसी कंपनियां इसके निर्माण में सक्षम हैं। जहां तक ड्रोन निर्माण की बात है तो भारत में इस सेक्टर में 550 से अधिक कंपनियां काम कर रही हैं और यह 2030 तक इस क्षेत्र में ग्लोबल हब बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसका कारोबार 11 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। जहां तक सुसाइड ड्रोन या लोइटरिंग म्यूनिशन बनाने की बात है तो सोलार डिफेंस नागास्त्र सीरीज पर काम कर रहा है, तो टाटा एडवांस्ड सिस्टम ने एएलएस-50 विकसित किया है। वहीं न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज भी बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा है।
लोइटरिंग म्यूनिशन या सुसाइड ड्रोन क्या है?
लोइटरिंग म्यूनिशन बिना पायलट वाला एक विमान है, जो टारेगट के ऊपर मंडराने, सटीक हमले के लिए सबसे बेहतर समय का इंतजार करने में सक्षम होते हैं। एक बार जब यह टारगेट को लॉक कर लेते हैं, तो उसपर गिरने के साथ ही खुद को विस्फोट करके उड़ा देते हैं। इसीलिए इसे आत्मघाती ड्रोन कहा जाता है। इसकी डिजाइनिंग ऐसी होती है कि सिर्फ टारगेट को ही नुकसान पहुंचाते हैं; और आसपास के क्षेत्र का जोखिम कम हो जाता है।
स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन की क्या है खासियत
भारतीय सेना के पास सोलार इंडस्ट्री का जो नागास्त्र-1 ऑपरेशन सिंदूर से पहले से है, वह डेढ़ किलो तक विस्फोटक लेकर 15 किलोमीटर तक जा सकता है। इसकी रेंज 30 किलोमीटर तक भी बढ़ाया जा सकता है। इसकी खासियत ये है कि अगर टारगेट का पता नहीं चल पाया या मिशन रोकना पड़ा तो इन्हें वापस बुलाया जा सकता है। फिर इन्हें पैराशूट की मदद से सुरक्षित लैंड करवाया जा सकता है। यह तकनीक कुछ ही विकसित देशों के पास है। इसी तरह से वेदा एयरोनॉटिक्स की ओर से सुरेशास्त्र एमके-1 विकसित होने की भी रिपोर्ट है। इसकी रेंज 150 किलोमीटर और विस्फोटक पेलोड क्षमता 90 किलो तक बताया जा रहा है। कई मामलों में स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन 9 घंटे तक आसमान में मंडराते रह सकते हैं।
सशस्त्र सेनाओं में क्यों बढ़ रही है डिमांड
स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह इसी तरह के विदेशी अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) के मुकाबले काफी किफायती, लेकिन फिर भी बहुत ही घातक हैं। ऐसे में इस तरह के ड्रोन से विदेशों पर निर्भरता कम हो गई है। पूरी तरह से स्वदेशी होने से यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ज्यादा उपयोगी हैं। यही नहीं, इन्हें भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना की अपनी-अपनी जरूरतों और अलग-अलग मोर्चों की अहमियत को देखते हुए कस्टमाइज किया जा सकता है।
आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास वाले हथियार
इस तरह के देशी आत्मघाती ड्रोन खरीदने का मतलब यह है कि इससे भारतीय सशस्त्र सेनाओं को अपनी डेटा को सुरक्षित रखने का बेहतर अवसर मिल जाता है और यह भारत के लिए इंटेलिजेंस जुटाने से लेकर कॉम्बैट ऑपरेशन तक में ज्यादा प्रोटेक्टेड हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार की गई डिजाइन की वजह से ही ऑपरेशन सिंदूर में नागास्त्र-1 आर के सटीक इस्तेमाल की रिपोर्ट है। इससे सशस्त्र सेनाओं को आत्मनिर्भरता की भावना के साथ ही एक आत्मविश्वास का भाव भी मिलता है। यही नहीं, इसके माध्यम से जरूरत के हिसाब से सप्लाई चेन बनाए रखना भी कहीं ज्यादा आसान है, जो विदेश से आयात किए गए सिस्टम के लिए हर समय संभव नहीं।
लोइटरिंग म्यूनिशन का रणनीतिक प्रभाव
लोइटरिंग म्यूनिशन सशस्त्र सेनाओं के लिए बड़े और घातक लड़ाकू विमानों के मुकाबले बहुत ही सस्ते विकल्प हैं, जिसका देश में ही बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव है। भारत जैसे देश में आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए भी यह बहुत ही उपयोगी है। इसकी सटीक मारक क्षमता सुरक्षा बलों का काम बहुत आसान कर देती है। हालिया युद्धों के विश्लेषण से पता चलता है कि परंपरागत मिसाइलों की तुलना में यह कहीं ज्यादा बेहतर विकल्प साबित हो रहे हैं। क्रूज मिसाइलों के लिए अंतिम समय में टारगेट को नए सिरे से सेट करना आसान नहीं है, लेकिन लोइटरिंग म्यूनिशन की यह मूल विशेषता है।













