फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ स्टेट सीक्रेट्स प्रोटेक्शन ने इस संबंध में चिंता जताते हुए बाकायदा अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर आर्टिकल पब्लिश किया है। इस आर्टिकल में बताया गया है कि सेना के लोग कैसे विदेशी खुफिया एजेंसियों के हनी ट्रैपिंग का शिकार हो रहे हैं। साथ ही उनको इससे बचने के लिए भी मशविरा दिया गया है।
गुओ के जाल में फंसने का हवाला
इस आर्टिकल एक आदमी गुओ के बारे में बताया है। गुओ एक मेन लैंड मिलिट्री कंपनी में काम करता है। वह अनजान विदेशी शहर की यात्रा पर था, जहां उसे एक प्रोजेक्ट लेना था। अपनी यात्रा के दौरान गुओ एक जासूस से मिला जो खुद को बिजनेस रिप्रेजेंटेटिव बता रहा था और जानबूझकर प्लान किए गए सोशल मौकों पर उससे मिला।
आर्टिकल में कहा गया है कि यह देखने में तो एक अचानक हुई मुलाकात लग रही थी लेकिन असल में यह विदेशी इंटेलिजेंस एजेंसी का बिछाया गया हनी ट्रैप था। गुओ के इस दौरान विदेशी जासूस एजेंसी की महिला के साथ शारीरिक संबंध बन गए। इसके बाद उस महिला ने संबंध पब्लिक करने की धमकी देकर गुओ को अपने साथ मिला लिया।
गुओ से उगलवाए राज
गुओ को धमकी देते हुए उसे संगठन का काम करने लिए भर्ती कर लिया गया। चेन नाम के एक टेक्निकल एक्सपर्ट और ली नाम के एक स्टाफ मेंबर को भी इस संगठन में भर्ती किया गया। इनसे इंटेलिजेंस और सेना के राज विदेशी एजेंसी ने उगलवा लिए। इंटेलिजेंस एक्सचेंज के दौरान गुओ ने ऑन-साइट इंटरप्रेटर के तौर पर काम किया।
आर्टिकल में इससे बचने के लिए इंटरनल सिक्योरिटी मैनेजमेंट बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया है। इसमें विदेश यात्रा करने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए फुल साइकिल मैनेजमेंट फ्रेमवर्क का प्रस्ताव है, जिसमें यात्रा से पहले सुरक्षा समीक्षा और विदेश में सक्रिय निगरानी से लेकर लौटने के बाद ऑब्जर्वेशन तक शामिल है।
बेहतर सुरक्षा प्रणालियों की मांग
आर्टिकल लंबे समय तक संस्थागत निगरानी को बेहतर बनाने के लिए अनिवार्य खुलासे की नीतियों की सिफारिश करता है। इसमें कर्मचारियों को सभी विदेशी संबंधों की घोषणा करना जरूरी होगा। लेख में कहा गया है कि हमें विदेश जाने वाले कर्मचारियों की जागरूकता और राजनीतिक समझ को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।












